एकमकार

मेरे प्रिय मेरा प्रेम तुमसे है 
आज से नहीं सदियों से है 
न बात करूँ 
न मिलूँ 
न देखूँ 
तब भी प्रेम तो तुमसे ही है, था और रहेगा सदियों तक 
न सजूँ 
न सबरु
न निहारूँ आईना 
तब भी निखरी रहूँ प्रेम में सज सँवर के हर पल में 
है अलौकिक 
है मौलिक

है असीम 
मेरे प्रियतम का अनुपम,अथाह प्रेम मन से मन में !!
मेरे अहसास सिर्फ तुमसे हैं 
आज से नहीं सदियों से हैं !!
सीमा असीम 



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