जब तुम आ जाते हो ,, बोलते बतियाते हो ,,,,गम न जाने कहाँ चले जाते हैं....उदासी मुस्कराती है और खामोशियाँ किसी कोयल की तरह से कुहकने लगती हैं तुम चूम लेते हो आगे बढ़कर मेरा माथा ,,,,तन मन झूम उठता है लहरा कर ॥प्रीति प्रेम का यह रिश्ता है प्रिय ...हमसे है ,, हमारे प्रेम से है बिना किसी चाह के बंधा हुआ है जिसके फंदे तुमने कस कस के लगाए हैं कोई लाख कोशिश करे न कभी टूटा है और न कभी कोई तोड़ पाएगा ....
सीमा असीम
सीमा असीम
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