सुबह सबेरे हाथ में छोटा सा थैला पकडे धीरे धीरे चली आती है अब जिस्म में उतनी जान नहीं है फिर भी वे अपनी गाडी खींचती रहती हैं बड़ी सफाई से बर्तन धोती है पोंचा बैठ कर लगता नहीं है   

 


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