पतझड़

 पतझड़ तो चला गया है दुम दबाकर 

बसंत ने अपना साम्राज्य फैला दिया है 

दस्तक दे दी हैआहिस्ता से  गर्मी ने 

सूरज की किरणों ने व्याकुल कर दिया 

पशु पक्षी के साथ साथ हम इंसान भी 

तपती  धूप से बचने को छाया की 

ओट तलाशने लगे हैं 

मौसम की मार ने सदा गरीबों और 

निरीहों को ही अपना शिकार बना लिया 

!!!

सीमा असीम 

३०,4,२४


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