तुम चाहें किसी भी तरह से मुझे परेशान करो
याद करके या फिर भुलाकर
हर स्थिति में स्थिति में है मैं तो सिर्फ
तुम्हारे ही मन में हूं और तुम्हारी बातों में भी हूं
भले ही उन बातों को तुम कभी किसी से कह नहीं पाते हो सुन नहीं पाते हो
खुद ही खुद मन ही मन दोहराते रहते हो, कहते रहते हो और सुनते भी रहते हो
बस यही तो प्रेम है
सीमा असीम
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