साथ तुम्हारे
ख़ुशी के पलों को याद करने से
ख़ुशी लौट आती है
यह मैंने किसी से सुना था
बस इसलिए ही
मैं याद करती हूँ
उन चंद पलों को
जब मैं साथ साथ थी
धुंधलकी शाम थी
चाँद भी आसमान में आधा था
और नदी का किनारा था
पर हम पूरे थे
क्योंकि खुश थे
बहुत खुश
साथ तुम्हारे....
सीमा

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