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Showing posts from 2026
 उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी 
 कुछ दिनों के बाद पीहू की सोसाइटी में स्विमिंग पूल बनने का काम शुरू हो गया अब तो पीहू बहुत खुश थी कि स्विमिंग पूल बनेगा तो वह अपना सपना पूरा करेंगे छोटी सी पीहू यह नहीं जानती कि यह स्विमिंग पूल बड़े लोगों का बन रहा था अभी तो छोटे बच्चों का थोड़े दिनों के बाद बनेगा लेकिन वह तो खुश थी कि उनको स्विमिंग करने को मिलेगा खैर एक दिन बड़ा वाला स्विमिंग पूल बनकर तैयार हो गया बहुत सुंदर सा नीला नीला पानी चल ऐसे ही मिलता-दूत चलता हुआ पीहू जब भी उधर से निकलती उनका मन करता कि वह स्विमिंग कर ले लेकिन वहां तो बड़े-बड़े लोग स्विमिंग कर रहे थे फिर कुछ दिनों के बाद बड़ी स्विमिंग पूल के पास में ही एक छोटा सा स्विमिंग पूल भी बन गया जो छोटे बच्चों के लिए था तो छोटी सी पीहू खुशी के मारे नाचने लगे आप तो उनका सपना पूरा होगा मामा उनको स्विमिंग सिखाएंगे किसी तरह से स्विमिंग पूल तो तैयार हो गया आप उनको एक ट्रेनर की जरूरत थी क्योंकि मम्मी को स्विमिंग भी नहीं आती पीहू की और पीहू के पापा को भी स्विमिंग नहीं आती तो सिखाए कौन फिर उनकी मम्मी ने एक दिन सोसाइटी ऑफिस में जाकर पता किया कि छोटे बच्चों को स्विमिंग सीखने ...

प्यार आ गया है

 मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है  ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है  जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था  पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे  आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है  जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ  जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं  जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम 
चोट जब दिल पर लगती है  दर्द तो होता ही है  कोई चिंगारी भड़कती है  शोला बनता ही है  क्या तुम मुझे इस तरह से रुलाओगे  देखना एक दिन तुम सिर पटकते आओगे  नहीं करुँगी माफ़ तुम्हें यह वादा है मेरा  गिरोगे जमीं पर बहुत गहरी चोट खाओगे  काश होता अगर जीवन में एक ख़ून माफ़  तो सबसे पहले तेरा कत्लेआम करती  फिर चौराहे पर तुझे खड़ा कर देती  बताती दुनिया को धोखेबाज की यही सजा है  कोई बच्चों का खेल नहीं प्रेम न सिर्फ मजा है  तबाह हो जाता है जीवन बर्बाद हो जाता है  जो  सच्चे प्रेम में इस तरह दग़ा खाता है  रो रो कर गुजारी है रातें दिन को न सकूं मिला  तूने आग जो जलाई है उसमें तुझे ही भस्म करना है 
 कुछ तो है तेरे मन में जो मुझे तेरी याद हर पल सताती है  कभी आंसू तो कभी मुस्कान तो कभी उदासी छा जाती है  रहे तू कहीं भी किसी के साथ पर मेरे साथ तो हर वक्त मेरे दिल में रहता ह  जैसे कोई परछाई सा संग संग फिरता है  क्यों इस कदर मुझे सताता है  तू खुद ही बता दे तेरा अब मुझसे क्या नाता है  तू क्यों पल भर को भी नहीं मुझे भुलाता है  जो हर पल तेरा ही नाम मेरे लफ्जों पर आता है  दिल में एक आग सी जलाता है  मानो तेरी मोहब्बत मुझमे पकती है और चटक चटक कर मेरे चेहरे पर किसी हीरे की तरह चमकती है गमकती है दमकती है    तू तो सब जानता है  जानकर भी अनजान बना रहता है  कुछ तो राज है जो तू हर पल मुझे याद आता है  कोई तो ऐसी बात है जो हर पल मुझे तेरी यादों की तरफ तेरी बातों की तरफ खिंचे लिए जाती है  किसी दिन तू आएगा जो खुद ही तो खिंचा चला आएगा और  मैं तुझे कह दूंगी नहीं चाहिए तू  जा अब तू अब तू क्यों आया है  सालों का इंतजार यूं ही मैं पल भर में ठुकरा दूंगी  जा तू अब मैं तुझे याद नहीं करूंगी लेकिन  तू ही बता क्...

प्रेम

कितना कठिन होता है न ,  ज़ब आप अपने प्रेम को  किसी और के साथ देखते हो..... सहन ही नहीं होता .... लगता है किसी ने प्राण ही खींच लिए हैं  उसके बाद भी  दिल उसे ही याद करता है  उसके लिए ही तड़पता है  दुआओं में उसे ही मांगता है  मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे  हर जगह एक ही दुआ  ऐसा क्यों होता है  जबकि हम जानते हैं कि  उसने हमें मार दिया है  ब्लॉक करना किसी को  मौत देने से कम नहीं होता  जीते जी मारना और  इसकी सजा कानून नहीं  ईश्वर की अदालत में मिलती है  तुम्हें भी मिलेगी  जानती है मेरी आत्मा  फिर क्यों मेरा मन  तुम्हें ही प्रेम करता है  तुम्हारी ही याद में पल पल जीता है  क्या है यह? क्या यही है सच्चा प्रेम .....💔 सीमा असीम 
 मुबारक हो मुबारक हो तुझे  मुझे हरा कर तू जीत गया  तेरी कामयाबी के लिए तुझे मुबारकबाद  जिसके कारण तुमने मुझे ब्लॉक किया  तूने मेरी आत्मा का खून किया  मुझे हजार हजार आंसू रुलाया  उसे तू आज अपने बगल में खड़ा करके बहुत खुश है  बहुत बहुत ज्यादा महान बन रहा होगा ना तू आज  लेकिन याद रख तेरे कर्म कभी तेरा पीछे नहीं छोडेंगे  तूने जो भी कर्म करे हैं उसका खामियाजा  मां वैष्णो देवी तुझे देंगी और जरूर देंगी  मैं तो आज बहुत खुश हूं कि  मुझे तुझ जैसे राक्षस से माँ ने दूर कर दिया  लेकिन अब तेरे कर्म तेरा कभी पीछा नहीं छोड़ेगे  तेरा अंत निश्चित है  याद रख तुझे कोई नहीं बचा सकता  मां वैष्णो देवीअब तेरा सीना फाड़ के ख़ून पियेंगी..
 नफरत से हम कभी भी प्रेम को नहीं जीत सकते  हमें प्रेम को जीतने के लिए प्रेम ही करना होता है और  जब हम प्रेम करने लगते हैं तो नफरत खुद ही  स्वतः ही खत्म हो जाती है  मिट जाती है और  हमारे जीवन में प्रेम को भर देती है  प्रेम एक ऐसा शब्द है जो फैलता है  खिलता है और कभी-कभी बिखरता भी है  लेकिन बिखर जाने के बाद उसे समेटना हमारे हाथ में  होता है  अगर हम समेट लेते हैं तो हम भी सिमट जाते हैं  अगर हम बिखर जाते हैं  प्रेम को त्याग कर नफरत को अपना लेते हैं तो समझो कुछ नहीं बचा है जीवन खत्म है  इसलिए प्रेम का दामन कभी मत छोड़ाना  बस प्रेम करते रहो जब  आप प्रेम को पकड़े रहोगे तो  प्रेम आपको कभी नहीं छोड़ेगा  कभी अकेला नहीं करेगा  कभी आपके मन में नफरत नहीं भरेगा  ना कभी आपको दर्द देगा  क्योंकि प्रेम शाश्वत है अनंत है ईश्वर है सीमा असीम  18,4,26
 तुमने वहीं किया जो तुम्हें अच्छा लगा  कभी मेरे बारे में सोचा तक नहीं  अगर सोचते समझते कभी मेरी नज़र से  तो तुम कभी ऐसा करते ही नहीं  क्या मिलेगा तुम्हें इन गिरी हरकतों से  मैं सभाल रही तुम्हें तुम गिरते चले गये  अपनी नजरों तक में गिर गये  मेरी नजरें तो तुम्हें पहले ही गिरा चुकी  मान लेते मेरी बात या मुझे समझ लेते  तो प्रिय तुम कभी गिरते ही नहीं  जो गिरा एक बार वो बार बार गिरता है  आखिर तुम भी ऐसे ही निकले  अब क्या कहूँ तुम्हें  अब बचा ही क्या कहने को  अब तुम संभल भी जाओ तो  मेरी नज़र में कभी उठोगे नहीं... सीमा 
मात्र एक शब्द भर नहीं है संघर्ष   बल्कि एक ऐसा शब्द है या फिर  जिंदगी का  जीवन का  वह सच है जो हमें मजबूत बनाता है  जिंदगी जीना सिखाता है  संघर्ष के बिना जिंदगी जिंदगी नहीं होती  जब हमारे रास्ते बहुत आसान होते हैं  तो हम बडी आसानी से चलते रहते हैं  कुछ परेशानी नहीं होती  जब वह रास्ते संघर्ष भरे होते हैं  कठिनाइयों भरे होते हैं तो  हम खुद को पहचान पाते हैं  हम इस कठिन रास्ते पर कैसे चल पाएंगे  कैसे आगे बढ़ पाएंगे  यह  संघर्ष ही हमें सिखाते हैं  खामोशी से अपना काम करते रहना  खामोशी से अपने आप को मजबूत बनाते रहना  भले ही हम भीतर से टूट जाए   खुद को कभी बिखरने न देना  हालात चाहे जैसे भी हो  अपने चाहे कितने भी रूठे हो  खुद हर बार संभल जाना है  खुद को खुद ही संभाल लेना है  कि संघर्ष ही हमारा गुरु होता है   हमें बिना बोले सब कुछ सीखता चला जाता है  जो जिंदगी में संघर्ष करना सीख जाता है  वह कभी हार नहीं मानता है या वह हार कर भी जीत जाता है... ...
 धरा पर रहना है तो घर धरा पर रहना है तो फूलों धरा पर रहना सीख लो पेड़ों पौधों को बचाए रखो पेड़ों पौधों को बचाए रखो फूलों पत्तों से जीना सीख लो नहीं सीख सकते हो तो जीवन व्यर्थ है इसलिए धरती पर रहना व्यर्थ है तुम तो शायद किसी और दुनिया के बने हो कि तुम्हें फूलों पत्तों से पेड़ों पौधों से भी प्यार प्यार नहीं की यही तो है जीवन के वह मंत्र जैसे जीवन बन जाता है खुशियों का तंत्र नमस्कार  बुद्ध तो बहुत सरल है बुद्ध तो बहुत सरल है कि वह त्याग कर चले गए अपना घर बार पति-पत्नी बच्चे और साथ पाठ पर सोचा है कभी यशोधरा के जीवन को पर सोचा है कभी यशोदा के जीवन को की कितने कासन से उसने निकले होंगे जीवन के दिन एवं अवस्था में पति वियोग क्या होता है वह यशोधरा से सीखो कैसे पाला होगा अपने बच्चों को कैसे संभाला होगा राजपथ को कभी सोचा है कि यशोधर ने कैसे गुजरे होंगे दिन अपने यमुनावस्था के गुजार ली होगी बच्चों को भी जैसे तैसे पाल पोस लिया होगा राज पाठ भी जैसे-जैसे संभाल लिया होगा पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी यशोधरा का कठिन जीवन कितनी मुश्क...
 कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...

और तुम

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 घने पेड़ों की छाँव हो  नदी का किनारा हो  थोड़ा सा सकूं हो और  हो थोड़े से सिर्फ तुम... सीमा असीम

चाँद

आती रही याद जिसकी सुबह से शाम तक  अरे वो तो चाँद है  जो छुप जाता है  सूर्य के उगते ही ||| सीमा असीम सक्सेना 
 गुजर जाता है वक़्त  पर वक़्त गुजरता नहीं  ठहर जाता मन वही  पर वहाँ से कभी हटता नहीं  अब तुम ही बताओ जरा  ऐसा होता है तो क्यों होता है  वैसा क्यों होता नहीं  जो चाहों वो पाओ  दिल क्यों अटका रहता है वहीं.... सीमा असीम  8,2,26

कहानी या किस्सा हूँ कोई

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 मैं तो बस एक कहानी  या किस्सा हूँ कोई   काश तुम भी  एक उपन्यास होते  किसकी कहानी   जो एक बार लिख दी गयीं  बस वही रहती है  कभी नहीं बदलती  जो लिख गई  सो लिख गयीं  क्यों हो गये तुम  एक अखबार से  जो बदल जाता है  हर बार  हर रोज  हर दिन.. सीमा असीम  1,2,26

न दुआ न बद्दुआ

रुला कर मुझे हँसने वाले  दुखा कर दिल मेरा खुश होने वाले   है हम तो अब ईश के सहारे  कि नहीं तू मेरी अब बद्दुआ के भी काबिल.. सीमा असीम  1,2,26

जो अपना है

 पा लिया तो क्या पाया  खो दिया तो क्या खोया  जो अपना है संग है सदा  दूर है जो तो क्या गया  याद किया, क्या याद किया  जो भुला दिया तो क्या भूला  जो रहता है अहसासों में  लौट आया तो क्या लौटा!! सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बिखरना

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 हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में  खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते  इसलिए जो बिखर गया है  उसे बिखर जाने दो क्योंकि  कभी-कभी बिखरी हुई चीजें   सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं  प्यारी लगती हैं  जैसे की बिखरी हुई नदी  जैसे कि पहाड़  जैसे की आकाश  बिखरे हुए खेत  जंगल  अगर इनको समेट देंगे तो  उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए  बिखरी हुई चीजें भी  कभी-कभी अच्छी लगती हैं  है ना हम बिखरे हुए हैं और  तुम भी तो बिखरे हुए हो  पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बेचैनी

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 मन की हर बेचैनी को  कैसे मैं शब्दों में ढाल दूँ  कि हद है शब्दों की  पर मेरी बेचैनी की  कोई भी हद है कहाँ.. सीमा असीम  30,1,26

इंतजार

 अब तो कोई आस भी नहीं है  अब तो कोई उम्मीद भी नहीं है  फिर भी क्यों रहता है मुझे  इंतजार तेरा  हर बार तेरे लौट आने का  लेकिन इंतजार कैसा  लौंटने का  कि जब तुम कहीं गये ही नहीं हो  पल भर को भी  मेरे मन से दूर... सीमा असीम सक्सेना  29,1,26

वजह

 मुस्कुराने के लिए किसी वजह का होना तो जरूरी नहीं है  हम मुस्कुरा तो कभी भी सकते हैं  हम मुस्कुरा तो कहीं भी सकते हैं  किसी भी प्रकार अपनी मुस्कान को कायम रख सकते हैं और सबसे अच्छी बात यह है  कि हम अक्सर बेवजह मुस्कुरा देते हैं.... सीमा असीम  29,1,26

जीत या हार

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 कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि  तुम हमेशा यही सोचते होंगे  कि तुम जीत गए  तुमने सबको हरा दिया  पर सच तो यह है   कि तुम हारे ही नहीं बल्कि  पूरी तरह से हार गए और  हम जीत गए  तुम्हें नहीं पता  हाँ नहीं पता कि  जीत क्या होती है और  हार क्या  तुम जीत कर भी हारे हुए हो  हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम  28,1,26

प्रेम

 प्रेम  प्रेम एक ऐसा शब्द है  जिसे सिर्फ अनुभूत किया जा सकता है  महसूस किया जा सकता है   उसका अहसास किया जा सकता है  उसे लिखा नहीं जा सकता हाँ प्रेम को लिखा नहीं जा सकता  है ना... सीमा असीम  27,1,26

पुकार

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 पुकारता है क्यों  क्यों पुकरता है  क्या नहीं जानता  क्या नहीं है पता  कि दिल को सब पता है  कि दिल सब समझता है  अहसासों के वन में  यूँ अकेला पड़ा है  कि पुकारता है क्यों... सीमा असीम  26,1,26

चक्की

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 चक्की चलाती महिला  जब इस तस्वीर को देखा तो मन में एक ख्याल आया,  पुराने जमाने के लोगों तक मुझे इस तस्वीर ने पहुंचाया   जहां होते होंगे गांव चक्की खेत खलियान और भरे पूरे मिटटी के घर  हालांकि अभी भी होते होंगे  पर नहीं दिखते कहीं ऐसे  कच्चे घर चक्की चूल्हा   जिसे देखते ही मन खुशी से भर जाए   मानों मन को सकुं का अहसास करा जाए   कितनी मेहनत करती पहले की औरतें  कितना काम करती घर की औरतें  जब वे सुबह सवेरे घर को साफ सुथरा करके लीप पोत कर  अपनी चक्की लेकर बैठ जाती   उसमें अनाज डाल कर पीसती   साथ ही और भी बहुत कुछ पीस लेती होंगी  आसपास कुछ और औरतें भी साथ में आकर भी बैठ जाती होगी  बोलते बतियाते हँसते मुस्कुराते कब उनका काम खत्म हो जाता होगा  पता ही नहीं चलता होगा संग साथ में किसी दुःख दर्द का भान भी नहीं होता होगा   यह मेहनती महिलायें कितना मेहनत करती सुबह से लेकर रात तक  घर के एक-एक काम को बड़ी लगन के साथ  करीने के साथ  करती रहती  कभी गाने गाती...

मुलाक़ात

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 सोचती हूँ  जब कभी उनसे मुलाकात होगी  क्या मन की सब उनसे बात होगी  कह भी पाऊंगी कुछ या  सब भूल जाऊंगी  आंखों से आंसू बहेंगे या  या जुबां तक कोई बात आएगी... सीमा असीम सक्सेना  22,1,26

तुम्हें

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 तुम्हें किस कदर चाहा है  तुम्हें किस कदर माना है  अहसास तक नहीं तुमको  तुम्हें किस कदर पुकारा है!! सीमा असीम 

खुश देखना तुम्हें

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 जिसे हम प्रेम करते हैं  मोहब्बत करते हैं और  अपना प्यार लुटा देते हैं  उसे खुश देखना  दुनिया का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है  लेकिन किसी गैर के साथ  नहीं   खुद के साथ!! सीमा असीम सक्सेना  20,1,26

तुम्हारा सच

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 तुम्हारा सच क्या है  तुम ही जानते हो  हम तो बस अंदाज लगाते रहते हैं  पर सच क्या है सच में हम नहीं जानते  हां बस दिल दुखता है थोड़ा  जब हम तुम्हें किसी और का होते देखते हैं  तब भी नहीं पता कि सच क्या है क्या नहीं  वह तो तुम ही जानते हो ना  सिर्फ तुम ही तो जानते हो कि  तुम्हारा सच है क्या आखिर... सीमा असीम  19,1,26
कि तुम याद आते हो  कि क्यों तुम याद आते हो  भर देते हो मन एक बेचैनी सी  कि किसी तरह से भी तुम दूर नहीं जाते हो  रहते मेरे मन के हरदम आसपास  बिना बुलाये क्यों चले आते हो  क्या तुम नहीं जानते मैं  याद नहीं करती हूँ तुम्हें पल भर को भी  पर तुम तुम क्षण भर को भी मेरे मन को  खाली होने का अहसास नहीं करते हो  मानों धुनी रमाये मेरे मन में बैठ जाते हो  कि हर जगह  हर किसी में मुझे तुम ही दिख जाते हो  तो बताओ न तुम  मुझे क्यों याद आते हो ? हाँ क्यों बेसबब याद आते हो ? सीमा असीम सक्सेना, बरेली  19,1,26