तुम जब तुम आए, तो लगा जैसे प्रेम ने मेरा हाथ थाम लिया.. मैंने कुछ नहीं कहा, बस तुम्हें देखा, और मेरे भीतर कहीं एक दिया जल उठा... तुम्हारे बिना ये जीवन कितना सूना सूना तुम मिले तो जैसे हर साँस में प्रेम घुल गया... मैं कविता क्या लिखूँ, तुम ही तो मेरी सबसे सुंदर कविता हो प्रिय.. सीमा असीम
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काश एक ऐसा शब्द जो हर किसी के मन में एक बार जरूर आता है मेरी मां में आता था मैं बार-बार इस शब्द को लिखती थी काश ,? जब एक बार तुमने इस शब्द को मेरी रचना में देखा तो तुमने कहा था एक कांच क्यों हटा दो काश उसे दिन के बाद मैं किसी भी रचना में काश लिखना छोड़ दिया था कभी लिखने का मन भी करता तो तुम्हारी बात याद आ जाती थी और मैं उसे नहीं लिखती थी, पर आज तो मेरा मन कर रहा है कि मैं इस शब्द को लिखूं कि काश , तुमने मुझे ना कहा होता काश मत लिखो, या मैं तुम्हारी बात ना सुनी होती नहीं मानी होती तुम्हारी बात.... सीमा असीम
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उसका झूठ झूठ भी कितना सच्चा बोला था उसने, कि हमने सच को भी झूठ मान लिया। कहता था — तुम सी हो, तुम्हारे बिना मर जाऊँगा। आज देखो, हमारे बिना भी जी रहा है, और हम उसी झूठ पर आज भी जी रहे हैं। उसके झूठ में भी एक अदा थी, सच से ज्यादा मीठी सदा थी। हम लुट गए उस सदा पर, और वो जीत गया अपनी अदा पर। अब किसी के सच पर भी यकीन नहीं आता, जब से उसका झूठ सबसे हसीन लगा था।
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बेवफा प्रेम तुमने कहा था साथ निभाओगे, राह कोई भी हो, चल जाओगे। हमने तुम्हारे लफ्ज़ों को खुदा माना, और तुमने उसी खुदा को भुला दिया। वादा था चाँद-तारों जैसा, निभाना था उम्र भर वैसा। पर तुम तो चाँद निकले, जो हर रात जगह बदल लेते हैं। हम आज भी उसी मोड़ पर हैं, जहाँ तुमने हाथ छोड़ा था। फर्क बस इतना है, अब हम रोते नहीं, मुस्कुराकर याद करते हैं। बेवफा तुम नहीं, तुम्हारा वक्त था, जो हमारे प्यार से बड़ा हो गया। और हम? हम आज भी वही हैं... तुम्हारे उस "हमेशा" का इंतजार करते हुए। सीमा असीम 23,8,26
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1. प्रेम प्रेम में बड़ा कुछ नहीं होता, प्रेम में छोटा भी कुछ नहीं होता बस एक बोतल पानी रख देना, बस एक गलती पर मुस्कुरा देना, और बारिश में चुपचाप बैठे रहना... 2. तुम तुम मिले फिर मिले दूर जाकर भी दूर गये नहीं एक आदत बन गयी और यह आदत रह गई, आदत ही तो है कभी कहीं नहीं जाती यह आदत.. सीमा 22,8,26 3उदास आज मन उदास है तो रहने दो, हर बात को समझना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी बस यूँ ही तुम्हारा ख्याल आना और हमेशा रहना प्रेम ही तो है..
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मैं हूँ यहाँ पर, तुम हो वहाँ पर, बीच में ये सावन की दीवार है मैं मेहंदी लगाए बैठी हूँ, तुम यादों में उलझे बैठे हो, मैं तीज गा रही हूँ, तुम किस ख्याल में बैठे हो? आ जाओ न, ये दूरी सही नहीं जाती है मुझे तो अब ये जुदाई बहुत रुलाती है सावन की ऋतु यूँ ही न चली जाये तेरी याद बेतरहा मुझे सताती है.. सीमा असीम 15,8,26
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ना याद रहा कहाँ रखा काजल, ना याद रहा किससे क्या बोला, रसोई में नमक की जगह चीनी डाल दी, और हँस कर खुद से ही बोली - ये क्या कर दिया! आईना देखूं तो तू दिखे, ख्वाब देखूं तो तू दिखे, लोग कहते हैं खोई-खोई रहती हूँ, मैं कहती हूँ - हाँ, तुम्हीं में तो खोई रहती हूँ। जबसे इश्क हुआ तुमसे, मैं मैं न रही, बस तेरी हो गयी। सीमा असीम 14,8,26
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इश्क मेरा रूहानी इश्क मेरा रूहानी है, न छूने का, न पाने का। न लिपस्टिक के रंग में है, न ज़ुल्फों के ढंग में है, ये तो उस एक नज़र में है, जो तुमने चुपके से देखी थी। ये जिस्मों का सौदा नहीं, ये दिलों का वादा नहीं, ये तो रूह से रूह के मिलने की एक सादी सी कहानी है। तुम पास हो तो सुकून है, तुम दूर हो तो भी जूनून है, इश्क मेरा रूहानी है, हर साँस में बस तू ही तू है। सीमा असीम 14,8,26
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मैं प्रेम में हूँ हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और अब मुझे सब सुंदर लगता है, हवाएँ भी गीत गाती हैं, और धूप भी मीठी लगती है। मैं प्रेम में हूँ, इसलिए आईने में खुद को ज्यादा देखती हूँ, हर बात पर मुस्कुराती हूँ, बिना वजह के। ये प्रेम ने क्या किया, दिल को इतना कोमल कर दिया, कि अब हर धड़कन बस, उसी का नाम लेती है। हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और यही मेरे जीवित होने का, सबसे सुंदर प्रमाण है।
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यह प्यार क्यों होता है पता नहीं यह प्यार क्यों होता है, बिना पूछे, बिना बताए, बस हो जाता है। न शक्ल देख कर होता है, न नाम देख कर, ये तो बस एक एहसास है, जो दिल को छू जाता है। कभी एक बात से हो जाता है, कभी एक मुस्कान से, और कभी तो बस, किसी के होने भर से। ये प्यार क्यों होता है, इसका जवाब किसी के पास नहीं, बस इतना पता है, जब होता है, तो ज़िंदगी खूबसूरत लगने लगती है।
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चलो फिर से किशोरी बन जाते हैं, जब प्रेम का मतलब बस आँखों-आँखों में बात होती थी, एक छोटी सी चिट्ठी, और दिन भर की मुस्कान। चलो फिर से वो बचपन जीते हैं, जहाँ प्रेम में कोई हिसाब नहीं था, न कल की चिंता, बस आज में जीना था। न कोई दिखावा, न कोई दुनियादारी, बस एक सच्चा, सादा, सा पहली बारिश जैसा प्रेम। हाथ में हाथ हो या न हो, दिल में तो प्रेम है न, तो चलो, फिर से उसी मासूमियत से प्रेम करते हैं।
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किशोरी आँखों में जो एक सपना जगा था, वो आज भी इस दिल में वैसा ही सजा है। वो पहली धड़कन, वो पहली सी लकीर, समय बीता, पर न मिटी वो तस्वीर। लोग कहते हैं इश्क़ उम्र देखता है, पर इश्क़ तो बस दिल में ही बसता है। वो किशोरी आज भी कहीं भीतर रहती है, तेरे नाम की माला आज भी कहती है। शेष फिर क्या बचा? बस यही तो बचा है, प्रेम... जो हर जन्म में सिर्फ़ तेरा ही रहा है।
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शाम होते ही प्रेम मेरी आँखों में उतर आता है मेरे मन में अहसास जगा जाता है जैसे शाम को दिया जलता है, बस वैसे ही उजाला कर जाता है। तुम्हें देखना प्रेम नहीं, तुम्हें सोचते हुए मुस्कुरा देना प्रेम है, तुम्हारा नाम सुनते ही अंदर कहीं कुछ खिल जाना प्रेम है मैं नहीं चाहती चाँद-तारे, न वादे बड़े-बड़े, बस तुम रहो, मेरे बुरे दिन में, मेरी थकी शाम में, मेरी खाली दोपहर में, मेरे पास। अगर कभी पूछो कि कितना चाहती हूँ, तो गिन नहीं पाऊँगी, बस इतना जान लो — जब तक साँस है, तुम हो, और जब तक तुम हो, मैं हूँ... तुम हो मेरे ही सदा ही सीमा असीम 11,8,26
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तुम्हें चाहा — जैसे धूप में कोई साया चाहे, जैसे थकी आँखें कोई ख्वाब चाहें, बिना जाने, बिना समझे, बस दिल ने कहा बस तुम चाहिए मुझे तुम्हें माँगा हर दुआ में, हर प्रार्थना में, खाली हाथों की हर याचना में, रब ने सुनी तो होगी मेरी सदा, जो तुम मेरी लकीरों में आये तुम्हें पाया — तो लगा ज़िंदगी मिल गई, अधूरी सी जो थी, वो पूरी खिल गई, तुम मिले तो इश्क़ को नाम मिला, तुम हो तो हर लम्हे को मुकाम मिला, चाहा था, माँगा था, पा लिया तुम्हें, अब बस तुम्हीं में उम्र तमाम हो जाए... सीमा असीम 11,8,26
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प्रेम जब मन में उतर आता है... तो घंटी नहीं बजती, बस अंदर कहीं बहुत धीरे से एक रोशनी जल जाती है, और तुम रोज़ के वही काम थोड़े ज़्यादा मन से करने लगते हो। तब आईने में चेहरा वही रहता है, पर आँखों में कोई और झांकने लगता है, गुस्सा थोड़ा देर से आता है, और माफ़ करना थोड़ा जल्दी आ जाता है। प्रेम जब मन में उतर आता है, तो तुम किसी को पाना नहीं चाहते, बस ये चाहते हो कि जिस वजह से मन इतना हल्का है, वो वजह कहीं उदास न हो... सीमा असीम 10,8,26
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देवदार तले" घने पेड़ों की छाँव या देवदार तले, चलें वहाँ जहाँ दुनिया ज़रा ठहरे। न शोर हो, न कोई जल्दी हो, बस तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ हो, और हवा में हमारे किस्से बिखरे। देवदार की खुशबू में लिपटा हो वक्त, और हम भूल जाएं, क्या खोया, क्या पाया, घने पेड़ों की छाँव तले, बस एक पल, जो सिर्फ हमारा हो। सीमा असीम 9,8,26
तुम्हारे बिना
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सच कहो कि जीवन क्या है तुम्हारे बिना, धड़कन तो चलती है, पर धड़कने का मजा नहीं। सच कहो कि शामें कैसी हैं तुम्हारे बिना, दिया तो जलता है, पर उजाले का मजा नहीं। सच कहो कि मैं क्या हूँ तुम्हारे बिना, नाम तो मेरा है, पर पहचान का मजा नहीं। तुम हो तो जीवन है, तुम हो तो जहान है, तुम नहीं तो इस जीवन का कोई निशान नहीं। सीमा असीम 8,8,26
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वो पल जब हाथ हो तेरा मेरे हाथों में, तो लगे जैसे जहाँ थम गया हो साँसों में। न कोई गम, न कोई फिक्र बाकी रहे, बस तू और मैं, और ये लम्हा बाकी रहे। तेरी उँगलियों की गर्मी से दिल धड़कता है, तेरे छूने भर से हर ख्वाब महकता है। बस यही दुआ है उस एक पल के लिए, कि उम्र बीत जाए तेरा हाथ मेरे हाथों में लिए। सीमा असीम
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तुम ही हो मेरे... तुम ही हो मेरे सुबह की पहली रौशनी, तुम ही हो मेरे शाम की आखिरी ख्वाहिश। तुम ही हो मेरे लबों की अधूरी हँसी, तुम ही हो मेरे दिल की पूरी ख़ामोशी। तुम मिलो तो लगता है, सब मिल गया, तुम न हो तो लगता है, कुछ भी नहीं रहा। तुम ही हो मेरे हर ख्वाब का मतलब, तुम ही हो मेरे हर लफ्ज़ का मकसद। तुम हाथ थाम लो तो सफर आसान लगे, तुम साथ चलो तो हर राह में आसमान लगे.. सीमा असीम 8,8,26
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मेरे प्रिय, मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ, अथाह, अनंत मेरे प्रिय, मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ, जैसे दिया बाती से करता है — बिना किसी शर्त के, बिना किसी शोर के, बस जलता है निरंतर.. ये प्रेम गिना नहीं जा सकता, न दिनों में, न सालों में। ये अथाह है — जैसे आँखें बंद करूँ तो भी तुम, और आँखें खोलूँ तो भी तुम। मैंने तुम्हें पाने के लिए प्रेम नहीं किया, मैंने प्रेम किया, इसलिए तुम्हें हर जगह पा लिया। तुम पास हो तो संसार पूरा लगता है, तुम दूर हो तो भी मन खाली नहीं लगता, क्योंकि तुम तो मन में हो — और मन तो अनंत है। अगर कभी पूछो कि कितना, तो इतना समझना — जितना शब्द कह न सकें, और जितना मौन छुपा न सके। तुम्हारी मैं वही जो तुम्हें मन में रखती है, अनंत तक। सीमा असीम 7,8,26
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तू है पर तेरी याद गले लगाती है तू है पर तेरी याद गले लगाती है, जैसे शाम ढले चाय याद आती है। तू पास है, फिर भी हवा में ढूँढू तुझे, तेरी खुशबू हर खाली कोने में मुस्कुराती है। कभी-कभी लगता है, तू नहीं, तेरा एहसास मेरे साथ चलता है, मेरे शब्दों में, मेरी चुप्पी में, वो ही तो हर बात संभालता है। तू है पर तेरी याद गले लगाती है, और इसी याद में, मैं खुद को थोड़ा और पा जाती हूँ।
लोहिया पुल की औरतें
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लोहिया पुल की औरतें बरेली में लोहिया पुल के ठीक नीचे एक छोटा सा प्राइमरी स्कूल था। पीपल के पेड़ वाला स्कूल। उस स्कूल में पिछले बाईस साल से सुजाता पढ़ा रही थी। सुजाता मैडम। स्कूल क्या था, दो कमरे और एक बरामदा। एक कमरे में पहली और दूसरी, दूसरे में चौथी और पाँचवी। तीसरी क्लास बरामदे में बैठती थी, पीपल की छाया में। दीवारों पर बच्चों के हाथ से बने चार्ट टंगे थे - 'क से कबूतर', 'नदी के लाभ'। एक कोने में टूटी हुई ब्लैकबोर्ड थी जिस पर सुजाता रोज़ सुबह चॉक से लिखती - 'आज का सुविचार'। बाईस साल में उस स्कूल से कितने बच्चे निकले, इसका हिसाब सुजाता ने कभी नहीं रखा। रिक्शा वालों के बेटे, सब्जी बेचने वालियों की बेटियाँ, पुल के नीचे झुग्गी में रहने वाले वो बच्चे जिनके बाप-दादों ने कभी स्कूल का मुँह नहीं देखा था। सुजाता उन्हें अक्षर नहीं, नाम देती थी। फिर एक दिन एक नोटिस आया। नगर निगम की मुहर लगा हुआ। "लोहिया पुल चौड़ीकरण योजना के अंतर्गत पीपल वाला प्राइमरी स्कूल भवन को ध्वस्त किया जाना है। यहाँ एक आधुनिक पार्किंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। छात्रों को तीन किलोमीटर दूर शिवप...
जब तुम कहते हो मैं हूँ न"
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"जब तुम कहते हो मैं हूँ न" जब तुम कहते हो मैं हूँ न, तो डर भी ठहर जाता है। तूफ़ान भी रुक कर पूछता है, अब किसे डराना है। जब तुम कहते हो मैं हूँ न, तो अकेलापन भाग जाता है। एक तुम्हारे होने से ही, सारा जहाँ पास आ जाता है। जब तुम कहते हो मैं हूँ न, तो थका हुआ मन भी मुस्कुराता है। जैसे किसी सूखे पत्ते पर, पहली बारिश का बूँद गिर जाता है। बस यूँ ही कहते रहा करो, मैं हूँ न... मैं हूँ न... तुम्हारे इसी एक शब्द में, मेरा हर जन्म सँवर जाता है। सीमा असीम 6,8,26
मन से हो तुम सिर्फ मेरे ही, तन से कहीं भी
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मन से हो तुम सिर्फ मेरे ही, तन से कहीं भी मन से हो तुम सिर्फ मेरे ही, तन से चाहे जहाँ भी रहो। दुनिया घूम लेना सारी तुम, पर लौट कर मेरे ही मन में बहो। तन की दूरियाँ क्या मायने रखती हैं, जब मन ने तुम्हें अपना बना लिया। लोग कहते हैं पास नहीं हो तुम, मैंने तो तुम्हें साँसों में बसा लिया। तुम रहो जहाँ भी, गिला नहीं मुझको, बस मन की इस डोर को टूटने न देना। शरीर तो मिट्टी है, आनी-जानी है, तुम इस मन के घरौंदे में ही रहना। मैं बंधन नहीं मांगती तन का, मुझे तो तुम्हारे मन का साथ चाहिए। तन से कहीं भी होना तुम, पर मन से — बस मेरे ही पास चाहिए। सीमा असीम 6,8,26
प्रेम को ही जीना है मुझे बार-बार
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प्रेम को ही जीना है मुझे बार-बार प्रेम को ही जीना है मुझे बार-बार, चाहे धूप हो जीवन में या छाँव हो। तुम मिलो न मिलो, ये किस्मत की बात, पर मेरे हर लम्हे में बस तुम्हारा ही नाम हो। प्रेम को ही जीना है मुझे बार-बार, हर जन्म में, हर रूप में, हर सांस में। एक बार नहीं, सौ बार गिरूँ, उठूँ, पर गिरूँ भी तो सिर्फ तुम्हारे एहसास में। मैंने पूछा नहीं खुदा से कभी जन्नत का पता, मैंने माँगा नहीं कोई हिसाब, कोई हक। बस एक दुआ है जो हर बार माँगती हूँ, मेरा इश्क़ रहे, मेरा इश्क़ पाक। लोग जीते हैं दुनिया को, जमाने को, मैं जीती हूँ एक नजर, एक मुस्कान को। प्रेम ही पूजा है, प्रेम ही इबादत, और इसी इबादत में जीना है मुझे बार-बार। जीना तो सब जी लेते हैं एक बार, मुझे तो प्रेम में ही मरना है, और प्रेम में ही जीना है बार-बार। सीमा असीम 6,8,26
मेरा ही रहेगा
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मेरा ही रहा लोगों ने कहा वो चला गया, मैंने कहा नहीं, वो कहीं नहीं गया। वो मेरी प्रार्थनाओं में रहा, मेरी डायरी के कोने में रहा, मेरी चाय की पहली चुस्की में रहा, और मेरी आँखों की नमी में रहा। दुनिया ने कहा उसे भूल जा, मैंने हँस कर कहा - जो दिल में बस जाता है, वो कभी छूटता नहीं। वो मेरा था, वो मेरा है, और किसी न किसी रूप में वो मेरा ही रहेगा। सीमा असीम
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वो मेरा था, पर मेरा न हुआ वो मेरा था, पर मेरा न हुआ, एक ख्वाब था, जो पूरा न हुआ। उसकी हँसी मेरी सुबह थी, उसकी बातें मेरी शाम थीं, पर उसकी मंज़िल कोई और थी, हम तो बस रास्ते में मिले थे। मैंने उसे अपना जहाँ माना, उसने मुझे एक पल भर माना। मैंने उसके लिए दुआएँ लिखीं, उसने मेरी दुआओं को कभी पढ़ा ही नहीं। शिकायत नहीं है उससे आज भी, प्यार तो अपना काम कर गया। उसने जाना नहीं, पर मैंने तो प्यार करना सीख लिया। वो मेरा था, पर मेरा न हुआ, पर उससे जो प्यार किया, वो हमेशा मेरा ही रहा। सीमा असीम
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प्यार लौट आता है कहते हैं प्यार एक बार जाता है तो लौटता नहीं, पर मैं कहती हूँ, सच्चा प्यार तो लौट आता है। भले ही रूप बदल कर, भले ही किसी और के हाथों में, पर लौटता ज़रूर है। कभी माँ की दुआ बनकर, कभी दोस्त की हँसी बनकर, कभी अपने ही बच्चे की नन्ही उँगली थाम कर। जो प्यार तुमने सच्चे दिल से दिया था, वो व्यर्थ नहीं गया। वो ब्रह्मांड में कहीं जमा हो रहा था, और आज ब्याज समेत तुम्हारे पास लौट रहा है। इसलिए जो गया उसका शोक मत करो, जो आ रहा है, उसके लिए दिल के दरवाजे खुले रखो। क्योंकि प्यार - कभी खत्म नहीं होता, बस लौट आता है।
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अब मैं खुद से प्यार करती हूँ अब मैं किसी से शिकायत नहीं करती, जो जैसा है, वैसा स्वीकार करती हूँ। अब आँखों में आँसू नहीं, सपने रखती हूँ, टूटे दिल से भी हँसना सीख गई हूँ। जो चले गए, उन्हें जाने दिया, जो हैं, उन्हें दिल से अपनाया। अब मैं खुद की सबसे अच्छी दोस्त हूँ, अपनी ही रोशनी में सबसे ज्यादा रोज़ हूँ। क्योंकि मैंने समझ लिया है - खोकर ही पाया जाता है, और टूटकर ही बनना आता है।
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मेरा विश्वास पुख्ता हुआ बहुत बार टूटी हूँ, बिखरी हूँ, फिर खुद ही खुद को समेटा है, गिरी हूँ कई बार अंधेरे में, फिर खुद ही दिया जलाया है। लोगों ने कहा, "अब नहीं होगा", रास्तों ने कहा, "अब मंज़िल नहीं", पर हर बार दिल ने धीरे से कहा - "एक कोशिश और सही।" आज पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो हर ज़ख्म एक निशान नहीं, एक मेडल लगता है। कि हाँ, मैं लड़ी थी, और मैं जीती थी। इसलिए आज कहती हूँ, गर्व से, प्यार से, और पूरी साँस लेकर - मेरा विश्वास पुख्ता हुआ। कि मैं कम नहीं हूँ, कि मेरा वक्त आएगा, कि ईश्वर देर भले कर दे, पर अंधेर नहीं करता। और जो हाथ छूट गए, वो छूटने ही थे, ताकि जो हाथ थामने हैं, उनके लिए जगह बन सके। सीमा असीम
मेरा विश्वास - फिर से
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मेरा विश्वास - फिर से जब तुमने मेरा विश्वास तोड़ा, मेरा विश्वास दुनिया से ही उठ गया। जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा, मैंने दुनिया से ही नाता तोड़ दिया। विश्वास तो वो पूँजी थी मेरी, जो सिर्फ़ तुम्हारे नाम की थी। पर तुम उसके लायक ही नहीं थे, ये बात देर से समझी थी। मैं छली गई थी, ठगी गई थी, लड़खड़ा कर वहीं गिर पड़ी थी। फिर धीरे-धीरे, अकेले ही, मैं खुद ही खुद से चल पड़ी थी। फिर मेरा विश्वास खुद जगा, मेरा मनोबल फिर से बढ़ा। मैं अपने ही आत्मबल से फिर से खड़ी हो गई। ये सोचकर कि - अभी भी विश्वास बाकी है इस दुनिया में। सीमा असीम 5,8,26
कविता ❤️
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पुकारो ना मुझे थोड़ा जोर से पुकारो शायद तुम्हारी आवाज मुझ तक नहीं आ पा रही पुकार तो रहे हो तुम लेकिन तुम हल्के हल्के पुकार रहे हो बहुत धीमे-धीमे तुम्हारी आवाज निकल रही है थोड़ी जोर से आवाज निकालो जिससे मेरा तन मन झंकृत हो जाए रोम रोम खिल जाए और मां महक जाए प्रेम के सागर में गोते लगाकर निखार जाए क्या तुम नहीं जानते प्रेम कभी कम नहीं होता वह तो बढ़ता ही जाता है दूर रहो या पास उसमें कोई अंतर नहीं आता प्रेम तो मन में रहता है क्योंकि प्रेम ना कम होता है ना प्रेम ज्यादा होता है प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है... सीमा असीम 17,7,26
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आजा रे अब मेरा दिल तुम्हें पुकार रहा है सच्चे मन से गुहार लगा रहा है तुम तक मेरी आवाज तो पहुँच जाती होगी ना तुम्हें भी सोते-सोते नींद खुल जाती होगी ना और चौंक कर जग जाते होंगे ना और आसपास देखने लगते होंगे ना अपने बिस्तर को तटोल कर देखते होंगे ना शायद तुम्हें एहसास होता होगा कि मैं तुम्हारे पास नहीं लेटी हूं और तुम गुनगुनाने लगते हो लग जा गले से लेकिन तुम मुझे वहां नहीं पाते हो तो उदास हो जाते होंगे क्यों नहीं समझते तुम्हारे बिना उदासी का चोला ही पा लिया है मैंने तो अब आ जाओ या मुझे पुकार लो एक बार ही सिर्फ एक बार ही सीमा असीम 16,7,26 अपने सच्चे मन से...
कविता
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कभी आसमान के तारों को देखा है देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम 1 तारे को देखो कभी दूसरे तारे को देखो इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना और चांद बेचारा एक है तुम्हारा मन कहां लगेगा भला हैं न
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नित्या और जिम्नास्टिक वाली छत बड़े शहर में, जहाँ ऊँची-ऊँची बिल्डिंगें आसमान को छूती हैं और नीचे दिन भर गाड़ियाँ भागती हैं, वहाँ 15वीं मंजिल के एक छोटे से फ्लैट में रहती थी नित्या। नित्या के घर के सामने कोई बड़ा मैदान नहीं था। नीचे पार्क था भी तो वहाँ इतनी भीड़ होती थी कि भागने-दौड़ने की जगह ही नहीं मिलती थी। इसलिए नित्या घर में ही सोफे पर से कूदती, बालकनी में लुढ़कती रहती। पापा कहते, "अरे ये तो बंदरिया है!" मम्मी कहतीं, "इसकी एनर्जी को कहीं तो लगाना पड़ेगा।" एक दिन सोसाइटी के नोटिस बोर्ड पर एक पोस्टर लगा देखा - "सनशाइन जिम्नास्टिक अकादमी - अब हमारे क्लब हाउस में! 5 से 10 साल के बच्चों के लिए।" नित्या की आँखें चमक गईं। "मम्मी, मुझे जाना है!" अकादमी बड़े शहर जैसी ही थी - शीशे की दीवारें, रंग-बिरंगा बड़ा सा हॉल, नरम-नरम मैट, और हवा में उड़ते हुए रिबन। वहाँ शहर के अलग-अलग कोनों से बच्चे आते थे। कोई अंग्रेजी में बात करता, कोई हिंदी में, पर सबको एक ही चीज़ आती थी - उछलना! शुरू में नित्या को बड़ा अजीब लगा। बाकी लड़कियाँ तो पहले से ही हैण्डस्टैंड कर लेत...
प्रेम कविता ❤️
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तुम क्या करते हो क्या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन मुझे बस इतना पता है कि तुम मुझे और सिर्फ मुझे ही प्रेम करते हो मेरा सच्चा प्रेम तुम्हारे मन में हर वक़्त उमड़ता रहता है और मुझे पुकारता रहता है याद करता रहता है तभी तो मैं यहां हर बार तुम्हें याद करती हूं तुम्हारी बात करती हूँ क्योंकि सच्चा प्रेम हर कोई नहीं करता और जो सच्चा प्रेम कर लेता है उसका प्रेम अथाह हो जाता है अनंत हो जाता है और अमर हो जाता है और फिर ब्रह्मांड में गूँजता रहता है उनका नाम जिसे लोग महसूस कर लेते हैं अहसास में भर लेते हैं.. सीमा असीम 14,7,26
मेरा मन, तेरा मन हिंदी कविता
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कि मेरा मन बस तुम्हारी तरफ ही खिंचा चला जाता है हर वक्त हर पल हर क्षण सिर्फ और सिर्फ तेरा ही नाम लिए चला जाता है रात को जब आंख खुल जाती है और पुकारने लगता है तुम्हें ही किसी काम को करते समय काम से मन हट जाता है और तेरा नाम ले ले कर पुकारता है मेरा मन न जाने तुझे ही याद करता है न जाने क्यों तुझे ही पुकारता है न जाने क्यों खिंचा चला जाता है मेरा मन तेरी ओर ही बार बार हर बार जिस राह से तू गुजरा होगा उस हर राह में तुम्हें भी मेरी ही याद आई होगी मेरी ही बातें याद आयीं होगी और तूने भी मुझे पुकार लिया होगा जोर से तो नहीं हाँ हल्के से ही पुकारा होगा हां तुमने मुझे जरूर अपने मन में गुनगुना लिया होगा किसी गीत, ग़ज़ल या कविता की तरह और ब्रह्मांड की ओर नजर उठाई होगी और मुस्कुरा दिया होगा मन ही मन सच कहूं यही तो प्रेम है जो तुम से दूर रहकर भी कभी कम नहीं हुआ कमी भुला नहीं और ना कभी इसमें जरा सा भी दूर होने का अहस...
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कभी-कभी मुझे लगता है की दुनिया में कुछ भी सच नहीं है पर ही लिखा हुआ है बुरा लगता है कोई झूठा होता है झूठ बोलता है या फिर हर बार वही झूठ बोलता है जो पकड़ में आ जाता है क्योंकि सच जो होता है इतने भी झूठ बोल लिया जाए छुपता नहीं है सच हमेशा सच रहता है उसे अपने आवर्त से त दबा ही नहीं सकता क्योंकि कितना भी झूठ बोल लो सच सामने ही आ जाता है और अक्सर ऐसा होता है जो इंसान झूठ बोल रहा होता है उसका सच हमें पता होता है फिर भी हमें लगता है जो वह बोल रहा है वही सच है लेकिन सच हमेशा सच ही रहता है और झूठ हमेशा झूठ कितना भी झूठ बोल लो सच सामने आ जाता है भले ही दुनिया झूठ है लेकिन सच ईश्वर है जिस को कभी नकारा नहीं जा सकता, वह सच जो कभी झूठ हो ही नहीं सकता ईश्वर है और सच भी है इस दुनिया में...
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जो मैं तुम्हें बार-बार याद करती हूं मैं यूं ही तो नहीं तुम्हें स्मृतियों में रखती हूँ कुछ तो बात होगी जरूर कुछ तो इसका कारण है अन्यथा मैं क्यों तुम्हें याद करूं मैं क्यों तुम्हारी बात करूं क्यों मैं तुम्हें लिखूं और क्यों मैं तुम्हें पढ़ूं मैं तुम्हें ही पढ़ती हूं रात हो या दिन हर पल में हर क्षण में सिर्फ मैं तुम्हें ही याद करती हूं तुम्हारी ही बात करती हूं मन ही मन तुम्हें दोहराती हूं और फिर उसे कागज पर उतार देते हैं की मन बहुत बेचैन है कि मन को चैन ही नहीं है एक पल भी तुम्हारे बिना जीने को तैयार ही नहीं होता जैसे जैसे रात गहराती जाती है तुम्हारी याद और ज्यादा और भी ज्यादा बढ़ती जाती है यह अंधेरा मेरे मन को और जागृत कर देता है और तुम्हारी यादों से रौशन कर देता है तुम भी ऐसे ही करते होंगे शायद तुम भी मुझे यूं ही याद करते होंगे और मेरी रोशनी से जगमगाते रहते होगे जैसे कि मैं तुम्हारी रोशनी से जगमगाती...
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मैं तो इन दिनों बहुत ही अचम्भे में हूं मैं तुम्हें देखूं या तुम्हारे करतबो को कैसे कर लेते हो तुम ऐसे करतब कैसे तुम फंसा लेते हो कैसे तुम चल कर लेते हो और कैसे तुम बिना निभाए और सबको निभाने को मजबूर कर देते हो सच में कमाल हो तुम जैसा कोई हो ही नहीं सकता इस दुनिया में कुछ कहा है करने के लिए मन ही नहीं है बस सोचती रहती हूँ कि यह कैसे कर पाते हो तुम कैसे आखिर कैसे?? सीमा असीम 9,6,26
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है प्रेम जो तूने मुझे दुख दिया जो तूने मुझे कष्ट दिया जो तूने मुझे तकलीफें दी उसके लिए तो क्या ही कहा जाए उसे तुम्हें कभी नहीं कह सकती उसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता लेकिन बस इतनी ही दुआ करती हूं तेरे लिए की तुझे दवाइयां तो मिले लेकिन दर्द ना मिले तुझे कोई तू सब कुछ देखे लेकिन तुझे देखने के लायक कोई अच्छा दृश्य ना मिले तुझे नींद आए लेकिन कोई सपना ना आए तुझे गीत तू सुन लेकिन तू कोई धुन ना बन पाए तुझे नाव तो मिले तू नाव में बैठे नाव में घूमें नाव में सैर करें लेकिन तुझे कभी नदी ना मिले तेरे ऊपर प्रेम के कोर ही कोर बरसते रहे कोड़े तो बरसे लेकिन तेरी पीठ पर एक भी नीला निशान ना मिले कि तू मेरे दर्द को क्या समझेगा कैसे समझ सकता है कि कभी दरवाजे को पकड़ के रोना कभी पेड़ पौधों को चिपक चिपक के बातें करना रोना उनसे अपने दुख दर्द को कहना फूलों के साथ बतियाना लेकिन तू कहां समझेगा यह सब इसीलिए तुझे बस यही है कि तुझे कभी नदी ना मिले...
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भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की एक वरिष्ठ और दिग्गज चरित्र अभिनेत्री हिमानी शिव परी को हिमानी शिवपुरी को कौन नहीं जानता देहरादून में 2022 24 अक्टूबर 1960 को हिमानी का जन्म हुआ था वीक लगभग 4 दशक से बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे कुछ-कुछ होता है हम आपके हैं कौन और उसके अलावा टीवी के भी बहुत सारे यादगार सो हैं जिन्होंने जिसमें उन्होंने भूमिका निभाई है उनका जन्म देहरादून में 24 अक्टूबर 1960 को हुआ था और उनके पिता हरि दत्त भट्ट शैलेश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि है और हिंदी के शिक्षक भी दून कॉलेज में शिक्षक थे जहां से अमिताभ बच्चन ने भी पढ़ाई की मां शैली भट्ट जो की ग्रहणी है हिमांशी पुरी की शुरुआती शिक्षा दोनों स्कूल से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने दव कॉलेज देहरादून से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया थिएटर वह कॉलेज के दिनों से ही करने लगी थी क्योंकि उनकी नाटक करने में बहुत रुचि थी और इसलिए उन्होंने अपने पार्ट टाइम में कभी भी वह शाम को टाइम मिलता था तो वह थिएटर करती थी वह कहती थी कि वह कहती है कि जब स्कूल पढ़ाई करने के बाद जब एक घंट...
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हे ईश्वर मुझे आपसे बहुत सारी शिकायतें हैं बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपसे कहना चाहती हूं उससे पहले बात तो यह है कि आप मुझे हमेशा इतना कम क्यों देते हो मुझे तो बहुत सारा चाहिए बहुत सारा, दुनिया की सारी खुशियां चाहिए और दुनिया में जितने सुख है वह सब मुझे चाहिए लेकिन आप समझते ही नहीं हो, क्यों नहीं समझते हो? मुझे वह सब चाहिए जो इस दुनिया में है और मैं खूब बड़ा सम्मान लेना चाहती हूं इस दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान और मैं कम से कम दो बंगले तो जरूर चाहती हूं मैं बड़ी-बड़ी दो गाड़ियां भी चाहती हूं और मैं बहुत सारा, बहुत सारा, बहुत सारा धन दौलत भी चाहती हूं लेकिन आप कंजूसी करने लगते हो,क्यों करते हो नहीं पता.. मैं चाहती हूं मेरा बेटा अमन बहुत बड़ी कंपनी का मालिक बन जाए और पूरी कंपनी में उसके कम से कम हजार नौकर हो जिसकी देखभाल करने लायक बन जाए, आपको करना होगा ना क्योंकि ऐसे तो काम ही नहीं चलेगा, आपको देना ही होगा मुझे बहुत सारा बहुत सारा सब कुछ...खुशियां,प्रेम, मान, सम्मान, इज्जत और धन दौलत...
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उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी
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कुछ दिनों के बाद पीहू की सोसाइटी में स्विमिंग पूल बनने का काम शुरू हो गया अब तो पीहू बहुत खुश थी कि स्विमिंग पूल बनेगा तो वह अपना सपना पूरा करेंगे छोटी सी पीहू यह नहीं जानती कि यह स्विमिंग पूल बड़े लोगों का बन रहा था अभी तो छोटे बच्चों का थोड़े दिनों के बाद बनेगा लेकिन वह तो खुश थी कि उनको स्विमिंग करने को मिलेगा खैर एक दिन बड़ा वाला स्विमिंग पूल बनकर तैयार हो गया बहुत सुंदर सा नीला नीला पानी चल ऐसे ही मिलता-दूत चलता हुआ पीहू जब भी उधर से निकलती उनका मन करता कि वह स्विमिंग कर ले लेकिन वहां तो बड़े-बड़े लोग स्विमिंग कर रहे थे फिर कुछ दिनों के बाद बड़ी स्विमिंग पूल के पास में ही एक छोटा सा स्विमिंग पूल भी बन गया जो छोटे बच्चों के लिए था तो छोटी सी पीहू खुशी के मारे नाचने लगे आप तो उनका सपना पूरा होगा मामा उनको स्विमिंग सिखाएंगे किसी तरह से स्विमिंग पूल तो तैयार हो गया आप उनको एक ट्रेनर की जरूरत थी क्योंकि मम्मी को स्विमिंग भी नहीं आती पीहू की और पीहू के पापा को भी स्विमिंग नहीं आती तो सिखाए कौन फिर उनकी मम्मी ने एक दिन सोसाइटी ऑफिस में जाकर पता किया कि छोटे बच्चों को स्विमिंग सीखने ...
प्यार आ गया है
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मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम
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चोट जब दिल पर लगती है दर्द तो होता ही है कोई चिंगारी भड़कती है शोला बनता ही है क्या तुम मुझे इस तरह से रुलाओगे देखना एक दिन तुम सिर पटकते आओगे नहीं करुँगी माफ़ तुम्हें यह वादा है मेरा गिरोगे जमीं पर बहुत गहरी चोट खाओगे काश होता अगर जीवन में एक ख़ून माफ़ तो सबसे पहले तेरा कत्लेआम करती फिर चौराहे पर तुझे खड़ा कर देती बताती दुनिया को धोखेबाज की यही सजा है कोई बच्चों का खेल नहीं प्रेम न सिर्फ मजा है तबाह हो जाता है जीवन बर्बाद हो जाता है जो सच्चे प्रेम में इस तरह दग़ा खाता है रो रो कर गुजारी है रातें दिन को न सकूं मिला तूने आग जो जलाई है उसमें तुझे ही भस्म करना है
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कुछ तो है तेरे मन में जो मुझे तेरी याद हर पल सताती है कभी आंसू तो कभी मुस्कान तो कभी उदासी छा जाती है रहे तू कहीं भी किसी के साथ पर मेरे साथ तो हर वक्त मेरे दिल में रहता ह जैसे कोई परछाई सा संग संग फिरता है क्यों इस कदर मुझे सताता है तू खुद ही बता दे तेरा अब मुझसे क्या नाता है तू क्यों पल भर को भी नहीं मुझे भुलाता है जो हर पल तेरा ही नाम मेरे लफ्जों पर आता है दिल में एक आग सी जलाता है मानो तेरी मोहब्बत मुझमे पकती है और चटक चटक कर मेरे चेहरे पर किसी हीरे की तरह चमकती है गमकती है दमकती है तू तो सब जानता है जानकर भी अनजान बना रहता है कुछ तो राज है जो तू हर पल मुझे याद आता है कोई तो ऐसी बात है जो हर पल मुझे तेरी यादों की तरफ तेरी बातों की तरफ खिंचे लिए जाती है किसी दिन तू आएगा जो खुद ही तो खिंचा चला आएगा और मैं तुझे कह दूंगी नहीं चाहिए तू जा अब तू अब तू क्यों आया है सालों का इंतजार यूं ही मैं पल भर में ठुकरा दूंगी जा तू अब मैं तुझे याद नहीं करूंगी लेकिन तू ही बता क्...
प्रेम
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कितना कठिन होता है न , ज़ब आप अपने प्रेम को किसी और के साथ देखते हो..... सहन ही नहीं होता .... लगता है किसी ने प्राण ही खींच लिए हैं उसके बाद भी दिल उसे ही याद करता है उसके लिए ही तड़पता है दुआओं में उसे ही मांगता है मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे हर जगह एक ही दुआ ऐसा क्यों होता है जबकि हम जानते हैं कि उसने हमें मार दिया है ब्लॉक करना किसी को मौत देने से कम नहीं होता जीते जी मारना और इसकी सजा कानून नहीं ईश्वर की अदालत में मिलती है तुम्हें भी मिलेगी जानती है मेरी आत्मा फिर क्यों मेरा मन तुम्हें ही प्रेम करता है तुम्हारी ही याद में पल पल जीता है क्या है यह? क्या यही है सच्चा प्रेम .....💔 सीमा असीम
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मुबारक हो मुबारक हो तुझे मुझे हरा कर तू जीत गया तेरी कामयाबी के लिए तुझे मुबारकबाद जिसके कारण तुमने मुझे ब्लॉक किया तूने मेरी आत्मा का खून किया मुझे हजार हजार आंसू रुलाया उसे तू आज अपने बगल में खड़ा करके बहुत खुश है बहुत बहुत ज्यादा महान बन रहा होगा ना तू आज लेकिन याद रख तेरे कर्म कभी तेरा पीछे नहीं छोडेंगे तूने जो भी कर्म करे हैं उसका खामियाजा मां वैष्णो देवी तुझे देंगी और जरूर देंगी मैं तो आज बहुत खुश हूं कि मुझे तुझ जैसे राक्षस से माँ ने दूर कर दिया लेकिन अब तेरे कर्म तेरा कभी पीछा नहीं छोड़ेगे तेरा अंत निश्चित है याद रख तुझे कोई नहीं बचा सकता मां वैष्णो देवीअब तेरा सीना फाड़ के ख़ून पियेंगी..
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नफरत से हम कभी भी प्रेम को नहीं जीत सकते हमें प्रेम को जीतने के लिए प्रेम ही करना होता है और जब हम प्रेम करने लगते हैं तो नफरत खुद ही स्वतः ही खत्म हो जाती है मिट जाती है और हमारे जीवन में प्रेम को भर देती है प्रेम एक ऐसा शब्द है जो फैलता है खिलता है और कभी-कभी बिखरता भी है लेकिन बिखर जाने के बाद उसे समेटना हमारे हाथ में होता है अगर हम समेट लेते हैं तो हम भी सिमट जाते हैं अगर हम बिखर जाते हैं प्रेम को त्याग कर नफरत को अपना लेते हैं तो समझो कुछ नहीं बचा है जीवन खत्म है इसलिए प्रेम का दामन कभी मत छोड़ाना बस प्रेम करते रहो जब आप प्रेम को पकड़े रहोगे तो प्रेम आपको कभी नहीं छोड़ेगा कभी अकेला नहीं करेगा कभी आपके मन में नफरत नहीं भरेगा ना कभी आपको दर्द देगा क्योंकि प्रेम शाश्वत है अनंत है ईश्वर है सीमा असीम 18,4,26
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तुमने वहीं किया जो तुम्हें अच्छा लगा कभी मेरे बारे में सोचा तक नहीं अगर सोचते समझते कभी मेरी नज़र से तो तुम कभी ऐसा करते ही नहीं क्या मिलेगा तुम्हें इन गिरी हरकतों से मैं सभाल रही तुम्हें तुम गिरते चले गये अपनी नजरों तक में गिर गये मेरी नजरें तो तुम्हें पहले ही गिरा चुकी मान लेते मेरी बात या मुझे समझ लेते तो प्रिय तुम कभी गिरते ही नहीं जो गिरा एक बार वो बार बार गिरता है आखिर तुम भी ऐसे ही निकले अब क्या कहूँ तुम्हें अब बचा ही क्या कहने को अब तुम संभल भी जाओ तो मेरी नज़र में कभी उठोगे नहीं... सीमा
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मात्र एक शब्द भर नहीं है संघर्ष बल्कि एक ऐसा शब्द है या फिर जिंदगी का जीवन का वह सच है जो हमें मजबूत बनाता है जिंदगी जीना सिखाता है संघर्ष के बिना जिंदगी जिंदगी नहीं होती जब हमारे रास्ते बहुत आसान होते हैं तो हम बडी आसानी से चलते रहते हैं कुछ परेशानी नहीं होती जब वह रास्ते संघर्ष भरे होते हैं कठिनाइयों भरे होते हैं तो हम खुद को पहचान पाते हैं हम इस कठिन रास्ते पर कैसे चल पाएंगे कैसे आगे बढ़ पाएंगे यह संघर्ष ही हमें सिखाते हैं खामोशी से अपना काम करते रहना खामोशी से अपने आप को मजबूत बनाते रहना भले ही हम भीतर से टूट जाए खुद को कभी बिखरने न देना हालात चाहे जैसे भी हो अपने चाहे कितने भी रूठे हो खुद हर बार संभल जाना है खुद को खुद ही संभाल लेना है कि संघर्ष ही हमारा गुरु होता है हमें बिना बोले सब कुछ सीखता चला जाता है जो जिंदगी में संघर्ष करना सीख जाता है वह कभी हार नहीं मानता है या वह हार कर भी जीत जाता है... ...
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धरा पर रहना है तो घर धरा पर रहना है तो फूलों धरा पर रहना सीख लो पेड़ों पौधों को बचाए रखो पेड़ों पौधों को बचाए रखो फूलों पत्तों से जीना सीख लो नहीं सीख सकते हो तो जीवन व्यर्थ है इसलिए धरती पर रहना व्यर्थ है तुम तो शायद किसी और दुनिया के बने हो कि तुम्हें फूलों पत्तों से पेड़ों पौधों से भी प्यार प्यार नहीं की यही तो है जीवन के वह मंत्र जैसे जीवन बन जाता है खुशियों का तंत्र नमस्कार बुद्ध तो बहुत सरल है बुद्ध तो बहुत सरल है कि वह त्याग कर चले गए अपना घर बार पति-पत्नी बच्चे और साथ पाठ पर सोचा है कभी यशोधरा के जीवन को पर सोचा है कभी यशोदा के जीवन को की कितने कासन से उसने निकले होंगे जीवन के दिन एवं अवस्था में पति वियोग क्या होता है वह यशोधरा से सीखो कैसे पाला होगा अपने बच्चों को कैसे संभाला होगा राजपथ को कभी सोचा है कि यशोधर ने कैसे गुजरे होंगे दिन अपने यमुनावस्था के गुजार ली होगी बच्चों को भी जैसे तैसे पाल पोस लिया होगा राज पाठ भी जैसे-जैसे संभाल लिया होगा पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी यशोधरा का कठिन जीवन कितनी मुश्क...
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कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...
बिखरना
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हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते इसलिए जो बिखर गया है उसे बिखर जाने दो क्योंकि कभी-कभी बिखरी हुई चीजें सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं प्यारी लगती हैं जैसे की बिखरी हुई नदी जैसे कि पहाड़ जैसे की आकाश बिखरे हुए खेत जंगल अगर इनको समेट देंगे तो उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए बिखरी हुई चीजें भी कभी-कभी अच्छी लगती हैं है ना हम बिखरे हुए हैं और तुम भी तो बिखरे हुए हो पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना 31,1,26
जीत या हार
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कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि तुम हमेशा यही सोचते होंगे कि तुम जीत गए तुमने सबको हरा दिया पर सच तो यह है कि तुम हारे ही नहीं बल्कि पूरी तरह से हार गए और हम जीत गए तुम्हें नहीं पता हाँ नहीं पता कि जीत क्या होती है और हार क्या तुम जीत कर भी हारे हुए हो हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम 28,1,26
चक्की
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चक्की चलाती महिला जब इस तस्वीर को देखा तो मन में एक ख्याल आया, पुराने जमाने के लोगों तक मुझे इस तस्वीर ने पहुंचाया जहां होते होंगे गांव चक्की खेत खलियान और भरे पूरे मिटटी के घर हालांकि अभी भी होते होंगे पर नहीं दिखते कहीं ऐसे कच्चे घर चक्की चूल्हा जिसे देखते ही मन खुशी से भर जाए मानों मन को सकुं का अहसास करा जाए कितनी मेहनत करती पहले की औरतें कितना काम करती घर की औरतें जब वे सुबह सवेरे घर को साफ सुथरा करके लीप पोत कर अपनी चक्की लेकर बैठ जाती उसमें अनाज डाल कर पीसती साथ ही और भी बहुत कुछ पीस लेती होंगी आसपास कुछ और औरतें भी साथ में आकर भी बैठ जाती होगी बोलते बतियाते हँसते मुस्कुराते कब उनका काम खत्म हो जाता होगा पता ही नहीं चलता होगा संग साथ में किसी दुःख दर्द का भान भी नहीं होता होगा यह मेहनती महिलायें कितना मेहनत करती सुबह से लेकर रात तक घर के एक-एक काम को बड़ी लगन के साथ करीने के साथ करती रहती कभी गाने गाती...
तुम्हारा सच
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तुम्हारा सच क्या है तुम ही जानते हो हम तो बस अंदाज लगाते रहते हैं पर सच क्या है सच में हम नहीं जानते हां बस दिल दुखता है थोड़ा जब हम तुम्हें किसी और का होते देखते हैं तब भी नहीं पता कि सच क्या है क्या नहीं वह तो तुम ही जानते हो ना सिर्फ तुम ही तो जानते हो कि तुम्हारा सच है क्या आखिर... सीमा असीम 19,1,26
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कि तुम याद आते हो कि क्यों तुम याद आते हो भर देते हो मन एक बेचैनी सी कि किसी तरह से भी तुम दूर नहीं जाते हो रहते मेरे मन के हरदम आसपास बिना बुलाये क्यों चले आते हो क्या तुम नहीं जानते मैं याद नहीं करती हूँ तुम्हें पल भर को भी पर तुम तुम क्षण भर को भी मेरे मन को खाली होने का अहसास नहीं करते हो मानों धुनी रमाये मेरे मन में बैठ जाते हो कि हर जगह हर किसी में मुझे तुम ही दिख जाते हो तो बताओ न तुम मुझे क्यों याद आते हो ? हाँ क्यों बेसबब याद आते हो ? सीमा असीम सक्सेना, बरेली 19,1,26