कविता

 कभी आसमान के तारों को देखा है 

देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न 

चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक 

तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना

 एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम 

1 तारे को देखो 

कभी दूसरे तारे को देखो 

इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना 

और चांद बेचारा एक है

 तुम्हारा मन कहां लगेगा भला 

हैं न 

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