मेरा मन, तेरा मन हिंदी कविता
कि मेरा मन बस तुम्हारी तरफ ही खिंचा चला जाता है
हर वक्त हर पल हर क्षण
सिर्फ और सिर्फ तेरा ही नाम लिए चला जाता है
रात को जब आंख खुल जाती है और
पुकारने लगता है तुम्हें ही
किसी काम को करते समय
काम से मन हट जाता है और
तेरा नाम ले ले कर पुकारता है मेरा मन
न जाने तुझे ही याद करता है
न जाने क्यों तुझे ही पुकारता है
न जाने क्यों खिंचा चला जाता है मेरा मन
तेरी ओर ही बार बार हर बार
जिस राह से तू गुजरा होगा
उस हर राह में तुम्हें भी मेरी ही
याद आई होगी
मेरी ही बातें याद आयीं होगी और
तूने भी मुझे पुकार लिया होगा
जोर से तो नहीं हाँ हल्के से ही
पुकारा होगा
हां तुमने मुझे जरूर अपने मन में गुनगुना लिया होगा
किसी गीत, ग़ज़ल या कविता की तरह
और ब्रह्मांड की ओर नजर उठाई होगी
और मुस्कुरा दिया होगा मन ही मन
सच कहूं यही तो प्रेम है
जो तुम से दूर रहकर भी
कभी कम नहीं हुआ
कमी भुला नहीं और
ना कभी इसमें जरा सा भी दूर होने का
अहसास ही आया
कि मन जुड़े हैं हमारे
एक ही डोर से
जो अदृश्य है
मजबूत है और
सच्ची है....
सीमा असीम
13,7,26
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