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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20
 है प्रेम जो तूने मुझे दुख दिया जो तूने मुझे कष्ट किया जो तूने मुझे तकलीफें दी उसके लिए तो क्या ही कहा जाए उसे तुम्हें कहीं नहीं सकती उसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता लेकिन बस इतनी ही दुआ करती हूं तेरे लिए की तुझे दवाइयां तो मिले लेकिन दर्द ना मिले तुझे कोई तू सब कुछ देखे लेकिन तुझे देखने के लायक कोई अच्छा दृश्य ना मिले तुझे नींद आए लेकिन कोई सपना ना आए तुझे गीत तू सुन लेकिन तू कोई धुन ना बन पाए तुझे नाव तो मिले तो नाव में बैठे नाव में घूम नाव में शहर करें लेकिन तुझे नदी ना मिले तेरे ऊपर प्रेम के कोर ही कोर बरसते रहे घोड़े तेरे बरसे लेकिन तेरी पीठ पर एक भी नीला निशान ना मिले कि तू मेरे दर्द को क्या समझेगा कैसे समझ सकता है कि कभी दरवाजे को पकड़ के रोना कभी पेड़ पौधों को चिपक चिपक के बातें करना रोना उनसे अपने दुख दर्द को कहना फूलों के साथ घूमने लेकिन तू कहां समझेगा यह सब इसीलिए तुझे बस यही है कि तुझे कभी नदी ना मिले तुझे नाव तो मिले घूमने को नदी ना मिले तुझे कोई अच्छा दृश्य ना मिले देखने को तुझे कोई सपना ना मिले तो कभी कोई सपना ना देख पाए ना तुझे कोई दर्द मिले तो बिल्कुल सपद ...
 भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की एक वरिष्ठ और दिग्गज चरित्र अभिनेत्री हिमानी शिव परी को हिमानी शिवपुरी को कौन नहीं जानता देहरादून में 2022 24 अक्टूबर 1960 को हिमानी का जन्म हुआ था वीक लगभग 4 दशक से बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे कुछ-कुछ होता है हम आपके हैं कौन और उसके अलावा टीवी के भी बहुत सारे यादगार सो हैं जिन्होंने जिसमें उन्होंने भूमिका निभाई है उनका जन्म देहरादून में 24 अक्टूबर 1960 को हुआ था और उनके पिता हरि दत्त भट्ट शैलेश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि है और हिंदी के शिक्षक भी दून कॉलेज में शिक्षक थे जहां से अमिताभ बच्चन ने भी पढ़ाई की मां शैली भट्ट जो की ग्रहणी है हिमांशी पुरी की शुरुआती शिक्षा दोनों स्कूल से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने दव कॉलेज देहरादून से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया थिएटर वह कॉलेज के दिनों से ही करने लगी थी क्योंकि उनकी नाटक करने में बहुत रुचि थी और इसलिए उन्होंने अपने पार्ट टाइम में कभी भी वह शाम को टाइम मिलता था तो वह थिएटर करती थी वह कहती थी कि वह कहती है कि जब स्कूल पढ़ाई करने के बाद जब एक घंट...
 हे ईश्वर मुझे आपसे बहुत सारी शिकायतें हैं बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपसे कहना चाहती हूं उससे पहले बात तो यह है कि आप मुझे हमेशा इतना कम क्यों देते हो मुझे तो बहुत सारा चाहिए बहुत सारा, दुनिया की सारी खुशियां चाहिए और दुनिया में जितने सुख है वह सब मुझे चाहिए लेकिन आप समझते ही नहीं हो, क्यों नहीं समझते हो? मुझे वह सब चाहिए जो इस दुनिया में है और मैं खूब बड़ा सम्मान लेना चाहती हूं इस दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान और मैं कम से कम दो बंगले तो जरूर चाहती हूं मैं बड़ी-बड़ी दो गाड़ियां भी चाहती हूं और मैं बहुत सारा, बहुत सारा, बहुत सारा धन दौलत भी चाहती हूं लेकिन आप कंजूसी करने लगते हो,क्यों करते हो नहीं पता..  मैं चाहती हूं मेरा बेटा अमन बहुत बड़ी कंपनी का मालिक बन जाए और पूरी कंपनी में उसके कम से कम हजार नौकर हो जिसकी देखभाल करने लायक बन जाए, आपको करना होगा ना क्योंकि ऐसे तो काम ही नहीं चलेगा, आपको देना ही होगा मुझे बहुत सारा बहुत सारा सब कुछ...खुशियां,प्रेम, मान, सम्मान, इज्जत और धन दौलत...
 
 उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी 
 कुछ दिनों के बाद पीहू की सोसाइटी में स्विमिंग पूल बनने का काम शुरू हो गया अब तो पीहू बहुत खुश थी कि स्विमिंग पूल बनेगा तो वह अपना सपना पूरा करेंगे छोटी सी पीहू यह नहीं जानती कि यह स्विमिंग पूल बड़े लोगों का बन रहा था अभी तो छोटे बच्चों का थोड़े दिनों के बाद बनेगा लेकिन वह तो खुश थी कि उनको स्विमिंग करने को मिलेगा खैर एक दिन बड़ा वाला स्विमिंग पूल बनकर तैयार हो गया बहुत सुंदर सा नीला नीला पानी चल ऐसे ही मिलता-दूत चलता हुआ पीहू जब भी उधर से निकलती उनका मन करता कि वह स्विमिंग कर ले लेकिन वहां तो बड़े-बड़े लोग स्विमिंग कर रहे थे फिर कुछ दिनों के बाद बड़ी स्विमिंग पूल के पास में ही एक छोटा सा स्विमिंग पूल भी बन गया जो छोटे बच्चों के लिए था तो छोटी सी पीहू खुशी के मारे नाचने लगे आप तो उनका सपना पूरा होगा मामा उनको स्विमिंग सिखाएंगे किसी तरह से स्विमिंग पूल तो तैयार हो गया आप उनको एक ट्रेनर की जरूरत थी क्योंकि मम्मी को स्विमिंग भी नहीं आती पीहू की और पीहू के पापा को भी स्विमिंग नहीं आती तो सिखाए कौन फिर उनकी मम्मी ने एक दिन सोसाइटी ऑफिस में जाकर पता किया कि छोटे बच्चों को स्विमिंग सीखने ...

प्यार आ गया है

 मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है  ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है  जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था  पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे  आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है  जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ  जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं  जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम