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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20
 दिल एक मंदिर है और तुम उसमें रहते हो, हम तो बस तुम्हारी पूजा करते हैं। तुम बसे हो साँसों में इस तरह, हर धड़कन में सिर्फ तुम ही तुम रहते हो। प्यार हमारा अमर है, ये तो तय है, हम तो हर जन्म बस तुम्हारे ही रहते हैं सीमा असीम  16,8,26
 तेरे नाम की रोशनी से दिल रोशन है, तेरे नाम से ही मेरी हर सुबह रोशन है। तेरे नाम लिख दी है ये ज़िंदगी, तेरे नाम से ही मेरा हर अफसाना रोशन है...
  मैं हूँ यहाँ पर, तुम हो वहाँ पर, बीच में ये सावन की दीवार है  मैं मेहंदी लगाए बैठी हूँ, तुम यादों में उलझे बैठे हो, मैं तीज गा रही हूँ, तुम किस ख्याल में बैठे हो? आ जाओ न, ये दूरी सही नहीं जाती है  मुझे तो अब ये जुदाई बहुत रुलाती है  सावन की ऋतु यूँ ही न चली जाये  तेरी याद बेतरहा मुझे सताती है.. सीमा असीम  15,8,26
 तीज का त्यौहार आया, सखी, साजन का पैगाम लाया। हरी-हरी चूड़ियाँ खनकी, मेहंदी से गोरी हथेली महकी, झूले पड़े नीम की डाली पर, गोरी झूले, गीत गाए मतवाली पर। सावन ने भी चूनर ओढ़ी, बादलों ने भी बिंदिया जोड़ी, धरती दुल्हन सी सजी है आज, देखो तीज का कितना है नाज़।
  ना याद रहा कहाँ रखा काजल, ना याद रहा किससे क्या बोला, रसोई में नमक की जगह चीनी डाल दी, और हँस कर खुद से ही बोली - ये क्या कर दिया! आईना देखूं तो तू दिखे, ख्वाब देखूं तो तू दिखे, लोग कहते हैं खोई-खोई रहती हूँ, मैं कहती हूँ - हाँ, तुम्हीं में तो खोई रहती हूँ। जबसे इश्क हुआ तुमसे, मैं मैं न रही, बस तेरी हो गयी। सीमा असीम  14,8,26
 इश्क मेरा रूहानी इश्क मेरा रूहानी है, न छूने का, न पाने का। न लिपस्टिक के रंग में है, न ज़ुल्फों के ढंग में है, ये तो उस एक नज़र में है, जो तुमने चुपके से देखी थी। ये जिस्मों का सौदा नहीं, ये दिलों का वादा नहीं, ये तो रूह से रूह के मिलने की एक सादी सी कहानी है। तुम पास हो तो सुकून है, तुम दूर हो तो भी जूनून है, इश्क मेरा रूहानी है, हर साँस में बस तू ही तू है। सीमा असीम  14,8,26
मैं प्रेम में हूँ हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और अब मुझे सब सुंदर लगता है, हवाएँ भी गीत गाती हैं, और धूप भी मीठी लगती है। मैं प्रेम में हूँ, इसलिए आईने में खुद को ज्यादा देखती हूँ, हर बात पर मुस्कुराती हूँ, बिना वजह के। ये प्रेम ने क्या किया, दिल को इतना कोमल कर दिया, कि अब हर धड़कन बस, उसी का नाम लेती है। हाँ, मैं प्रेम में हूँ, और यही मेरे जीवित होने का, सबसे सुंदर प्रमाण है।