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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20

कविता ❤️

 पुकारो ना मुझे  थोड़ा जोर से पुकारो  शायद तुम्हारी आवाज  मुझ तक नहीं आ पा रही  पुकार तो रहे हो तुम  लेकिन तुम हल्के हल्के पुकार रहे हो  बहुत धीमे-धीमे  तुम्हारी आवाज निकल रही है  थोड़ी जोर से आवाज निकालो  जिससे मेरा तन मन झंकृत हो जाए  रोम रोम खिल जाए और  मां महक जाए  प्रेम के सागर में गोते लगाकर निखार जाए  क्या तुम नहीं जानते  प्रेम कभी कम नहीं होता  वह तो बढ़ता ही जाता है  दूर रहो या पास  उसमें कोई अंतर नहीं आता  प्रेम तो मन में रहता है  क्योंकि प्रेम ना कम होता है  ना प्रेम ज्यादा होता है  प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है... सीमा असीम  17,7,26

कविता ❤️

 आजा रे अब मेरा दिल तुम्हें पुकार रहा है  सच्चे मन से गुहार लगा रहा है   तुम तक मेरी आवाज तो पहुँच जाती होगी ना  तुम्हें भी सोते-सोते नींद खुल जाती होगी ना  और चौंक कर जग जाते होंगे ना और  आसपास देखने लगते होंगे ना  अपने बिस्तर को तटोल कर देखते होंगे ना  शायद तुम्हें एहसास होता होगा कि  मैं तुम्हारे पास नहीं लेटी हूं और  तुम गुनगुनाने लगते हो लग जा गले से  लेकिन तुम मुझे वहां नहीं पाते हो तो  उदास हो जाते होंगे  क्यों नहीं समझते  तुम्हारे बिना उदासी का चोला ही पा लिया है मैंने  तो अब आ जाओ या मुझे पुकार लो  एक बार ही सिर्फ एक बार  ही  सीमा असीम  16,7,26 अपने सच्चे मन से...

कविता

 कभी आसमान के तारों को देखा है  देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न  चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक  तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना  एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम  1 तारे को देखो  कभी दूसरे तारे को देखो  इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना  और चांद बेचारा एक है  तुम्हारा मन कहां लगेगा भला  हैं न 
नेहा तुम्हें तो पता ही है कि मेरा ट्रांसफर जयपुर हो गया है और मैं इन दोनों वहीं पर हूं अभी कुछ दिनों के लिए मन से मिलने चली आई की मां भी अब यहां पर अकेली पड़ गई है बाइक चला गया है अच्छा कहां चला गया भाई बाइक कंप्लीट हो गया बीटेक तो उसकी जॉब लग गई है बेंगलुरु में अब माया अकेली है तो कुछ दिनों के लिए आ गई तुम अकेले क्यों रह रही ले जाओ उनको अपने साथ जयपुर यही तो प्रॉब्लम है वह कहीं जाना नहीं चाहती है जब से पापा नहीं रहे तब से तो वह और जिद्दी हो गई है कि नहीं मुझे यही रहना है इसी देरी पर पापा लेकर आए थे इसी देरी से विदा होना है मेरे भाई भी इतना कह रहा था लेकिन नहीं कहीं उसके साथ अब वहां परेशान रहता है मां की वजह से फिक्र तो लगी रहती है ना अब दूर इतना है कि ए भी नहीं सकता जल्दी तब भी वह तीसरे महीने चौथे महीने आ जाता है एक दो महीने का वर्क फ्रॉम होम लेकर की मां का ध्यान रख ले और ले जाने की कोशिश करें वर्मा वह कहां जाने वाली अच्छा यह तो प्रॉब्लम है बड़ी बुजुर्गों को समझाना बहुत मुश्किल होता है लेकिन एक बात तो बता तेरा चेहरा क्यों उतरा हुआ है सब ठीक तो चल रहा है ना लाइफ में हां बहन सब बढ़िया च...

प्रेम कविता ❤️

 तुम क्या करते हो  क्या नहीं  मुझे नहीं पता लेकिन  मुझे बस इतना पता है कि तुम मुझे और सिर्फ मुझे ही प्रेम करते हो  मेरा सच्चा प्रेम तुम्हारे मन में  हर वक़्त उमड़ता रहता है और  मुझे पुकारता रहता है  याद करता रहता है  तभी तो मैं यहां  हर बार तुम्हें याद करती हूं  तुम्हारी बात करती हूँ  क्योंकि सच्चा प्रेम  हर कोई नहीं करता और  जो सच्चा प्रेम कर लेता है  उसका प्रेम अथाह हो जाता है  अनंत हो जाता है और अमर हो जाता है  और फिर ब्रह्मांड में गूँजता रहता है उनका नाम  जिसे लोग महसूस कर लेते हैं  अहसास में भर लेते हैं.. सीमा असीम  14,7,26

मेरा मन, तेरा मन हिंदी कविता

 कि मेरा मन बस तुम्हारी तरफ ही खिंचा चला जाता है  हर वक्त हर पल हर  क्षण  सिर्फ और सिर्फ तेरा ही नाम लिए चला जाता है  रात को जब आंख खुल जाती है और  पुकारने लगता है तुम्हें ही  किसी काम को करते समय  काम से मन हट जाता है  और  तेरा नाम ले ले कर पुकारता है मेरा मन  न जाने तुझे ही याद करता है  न जाने क्यों तुझे ही पुकारता है  न जाने क्यों खिंचा चला जाता है मेरा मन  तेरी ओर ही बार बार हर बार  जिस राह से तू गुजरा होगा  उस हर राह में तुम्हें भी मेरी ही  याद आई होगी  मेरी ही बातें याद आयीं होगी और  तूने भी मुझे पुकार लिया होगा   जोर से तो नहीं हाँ हल्के से ही  पुकारा होगा  हां तुमने मुझे जरूर अपने मन में गुनगुना लिया होगा  किसी गीत, ग़ज़ल या कविता की तरह  और ब्रह्मांड की ओर नजर उठाई होगी  और मुस्कुरा दिया होगा मन ही मन  सच कहूं यही तो प्रेम है  जो तुम से दूर रहकर भी  कभी कम नहीं हुआ  कमी भुला नहीं और  ना कभी इसमें जरा सा भी दूर होने का  अहस...
 कभी-कभी मुझे लगता है की दुनिया में कुछ भी सच नहीं है पर ही लिखा हुआ है बुरा लगता है कोई झूठा होता है झूठ बोलता है या फिर हर बार वही झूठ बोलता है जो पकड़ में आ जाता है क्योंकि सच जो होता है इतने भी झूठ बोल लिया जाए छुपता नहीं है सच हमेशा सच रहता है उसे अपने आवर्त से त दबा ही नहीं सकता क्योंकि कितना भी झूठ बोल लो सच सामने ही आ जाता है और अक्सर ऐसा होता है जो इंसान झूठ बोल रहा होता है उसका सच हमें पता होता है फिर भी हमें लगता है जो वह बोल रहा है वही सच है लेकिन सच हमेशा सच ही रहता है और झूठ हमेशा झूठ  कितना भी झूठ बोल लो सच सामने आ जाता है   भले ही दुनिया झूठ है लेकिन सच ईश्वर है जिस को कभी नकारा नहीं जा सकता, वह सच जो कभी झूठ हो ही नहीं सकता  ईश्वर है और सच भी है इस दुनिया में...