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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20
 "तुम आओ तो" तुम आओ तो कुछ बात बने, ये जो शाम अधूरी सी है, पूरी लगे। तुम आओ तो चाय में भी मिठास आ जाए, जो बात लफ्ज़ों में नहीं, आँखों से कही जाए। तुम आओ तो ये घर थोड़ा घर लगे, ये दीवारें भी जरा मुस्कुरा दें, तुम आओ तो कुछ बात बने। सीमा असीम  9,8,26
 देवदार तले" घने पेड़ों की छाँव या देवदार तले, चलें वहाँ जहाँ दुनिया ज़रा ठहरे। न शोर हो, न कोई जल्दी हो, बस तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ हो, और हवा में हमारे किस्से बिखरे। देवदार की खुशबू में लिपटा हो वक्त, और हम भूल जाएं, क्या खोया, क्या पाया, घने पेड़ों की छाँव तले, बस एक पल, जो सिर्फ हमारा हो। सीमा असीम  9,8,26
 हम ऐसे ही" गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए, कभी रूठे तो, बिना बोले मनाए। न कोई दिखावा, न कोई बनावट, बस तुम हो, मैं हूँ, और थोड़ी शरारत। कभी चुप्पी में भी बातें हो जाएं, गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए
 "पहाड़ बुला रहे हैं" वो पहाड़, वो वादियाँ बुला रही हमें, कह रही हैं - आओ, थोड़ा साँस तो लो। जहाँ बादल झुक के कानों में कुछ कहें, जहाँ रस्ते भी हमें देख के मुस्कुराएँ। चलो ना, वहीं जहाँ, तुम मैं हो जाएँ, और मैं तुम, वो पहाड़, वो वादियाँ, सच में बुला रही हैं हमें। सीमा असीम  9,8,26

बार बार"

 बार बार" एक बार फिर, बार बार, उसी मोड़ पर आकर, फिर तुमसे प्यार हो जाता है। सोचती हूँ अब नहीं, अब तो आदत है तुम्हारी, फिर तुम्हारी हँसी देख, फिर से प्यार हो जाता है। एक बार फिर, बार बार, हर बार पहला सा लगता है, तुम्हारा प्यार। सीमा असीम  9,8,26

तुम्हारे बिना

 सच कहो कि जीवन क्या है तुम्हारे बिना, धड़कन तो चलती है, पर धड़कने का मजा नहीं। सच कहो कि शामें कैसी हैं तुम्हारे बिना, दिया तो जलता है, पर उजाले का मजा नहीं। सच कहो कि मैं क्या हूँ तुम्हारे बिना, नाम तो मेरा है, पर पहचान का मजा नहीं। तुम हो तो जीवन है, तुम हो तो जहान है, तुम नहीं तो इस जीवन का कोई निशान नहीं। सीमा असीम  8,8,26
 तुम हो तो जग सुंदर है, तुम हो तो हर पल सुनहरा है। तुम हो तो फूलों में खुशबू है, तुम हो तो चाँद में भी जादू है। तुम हँस दो तो सावन बरस जाए, तुम रूठो तो दिल तरस जाए। तुम हो तो ये ज़िंदगी, ज़िंदगी है, वरना तो बस साँसों की बंदगी है।