Posts

Image
मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20
 शाम होते ही प्रेम मेरी आँखों में उतर आता है  मेरे मन में अहसास जगा जाता है  जैसे शाम को दिया जलता है,  बस वैसे ही उजाला कर जाता है। तुम्हें देखना प्रेम नहीं, तुम्हें सोचते हुए मुस्कुरा देना प्रेम है, तुम्हारा नाम सुनते ही अंदर कहीं कुछ खिल जाना प्रेम है मैं नहीं चाहती चाँद-तारे, न वादे बड़े-बड़े, बस तुम रहो, मेरे बुरे दिन में, मेरी थकी शाम में, मेरी खाली दोपहर में, मेरे पास। अगर कभी पूछो कि कितना चाहती हूँ, तो गिन नहीं पाऊँगी, बस इतना जान लो — जब तक साँस है, तुम हो, और जब तक तुम हो, मैं हूँ... तुम हो मेरे ही सदा ही  सीमा असीम  11,8,26
 तुम्हें चाहा — जैसे धूप में कोई साया चाहे, जैसे थकी आँखें कोई ख्वाब चाहें, बिना जाने, बिना समझे, बस दिल ने कहा बस तुम चाहिए मुझे  तुम्हें माँगा हर दुआ में, हर प्रार्थना में, खाली हाथों की हर याचना में, रब ने सुनी तो होगी मेरी सदा, जो तुम मेरी लकीरों में आये  तुम्हें पाया — तो लगा ज़िंदगी मिल गई, अधूरी सी जो थी, वो पूरी खिल गई, तुम मिले तो इश्क़ को नाम मिला, तुम हो तो हर लम्हे को मुकाम मिला, चाहा था, माँगा था, पा लिया तुम्हें, अब बस तुम्हीं में उम्र तमाम हो जाए... सीमा असीम  11,8,26
 इश्क़ वो नहीं जो तुम्हें बेचैन कर दे, इश्क़ वो है जो तुम्हारी बेचैनी में तुम्हारे माथे पर हाथ रख दे। इश्क़ में हिसाब नहीं होता, कौन कितना झुका, कौन कितना चला, इश्क़ में बस इतना याद रहता है कि सामने वाला हँसा तो दिन बन गया... सीमा असीम  10,8,26
 प्रेम जब मन में उतर आता है... तो घंटी नहीं बजती, बस अंदर कहीं बहुत धीरे से एक रोशनी जल जाती है, और तुम रोज़ के वही काम थोड़े ज़्यादा मन से करने लगते हो। तब आईने में चेहरा वही रहता है, पर आँखों में कोई और झांकने लगता है, गुस्सा थोड़ा देर से आता है, और माफ़ करना थोड़ा जल्दी आ जाता है। प्रेम जब मन में उतर आता है, तो तुम किसी को पाना नहीं चाहते, बस ये चाहते हो कि जिस वजह से मन इतना हल्का है, वो वजह कहीं उदास न हो... सीमा असीम  10,8,26
 "तुम आओ तो" तुम आओ तो कुछ बात बने, ये जो शाम अधूरी सी है, पूरी लगे। तुम आओ तो चाय में भी मिठास आ जाए, जो बात लफ्ज़ों में नहीं, आँखों से कही जाए। तुम आओ तो ये घर थोड़ा घर लगे, ये दीवारें भी जरा मुस्कुरा दें, तुम आओ तो कुछ बात बने। सीमा असीम  9,8,26
 देवदार तले" घने पेड़ों की छाँव या देवदार तले, चलें वहाँ जहाँ दुनिया ज़रा ठहरे। न शोर हो, न कोई जल्दी हो, बस तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ हो, और हवा में हमारे किस्से बिखरे। देवदार की खुशबू में लिपटा हो वक्त, और हम भूल जाएं, क्या खोया, क्या पाया, घने पेड़ों की छाँव तले, बस एक पल, जो सिर्फ हमारा हो। सीमा असीम  9,8,26
 हम ऐसे ही" गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए, कभी रूठे तो, बिना बोले मनाए। न कोई दिखावा, न कोई बनावट, बस तुम हो, मैं हूँ, और थोड़ी शरारत। कभी चुप्पी में भी बातें हो जाएं, गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए