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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20

कविता

 कभी आसमान के तारों को देखा है  देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न  चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक  तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना  एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम  1 तारे को देखो  कभी दूसरे तारे को देखो  इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना  और चांद बेचारा एक है  तुम्हारा मन कहां लगेगा भला  हैं न 
 तो मां की सुंदरता मिली थी और उम्र भी 16 साल तो उसकी रंगत अलग ही थी चेहरे पर रौनक लगी थी अर्चना का पति बना हुआ था और उसकी बेटी को भी फंसा था वह अपने नजरों से उसे दौड़ता रहता है और अच्छी-अच्छी बातें करता है चल तुझे ना एक नौकरी करवा देता हूं तेरा खर्चा भी निकलेगा और टाइम भी पास होगा क्योंकि मुझे बेटी के आ जाने से मां के साथ समय बताएं का मौका नहीं मिल पा रहा था बेटी बोली ठीक है उसने भी सोच अच्छा लगेगा बाहर निकलेगी घर से हालांकि अभी वह पढ़ाई कर रही थी 11वीं क्लास में भी अभी थी लेकिन सोचा चलो टाइम पास करने के लिए कर लेते हैं निकाल कर देने का काम क्यों कर दिया सेक्स करता है वह दोनों एक दूसरे को प्रेम करने लगी क्या कहेंगे यह तो एक आकर्षण मंत्र था और फिर कहते हैं गलत रास्ते पर चल रही होती है उसके कल बेटी में ए जाते हैं कि जैसे संस्कार मां के होते हैं जैसे की कुछ बच्चे अच्छे निकल जाते हैं और मां अच्छी हो कुछ बच्चे गलत निकल जाते हैं मुश्किल से 15 दिन हुए थे और 15 दिन में नहीं उसे टाइम से प्यार हो गया और उसकी दुकान पर मात्र वह चार बार ही गई होगी कुछ खरीदने बिंदी कभी नेल पॉलिश या लिपस्टिक से म...

प्रेम कविता ❤️

 तुम क्या करते हो  क्या नहीं  मुझे नहीं पता लेकिन  मुझे बस इतना पता है कि तुम मुझे और सिर्फ मुझे ही प्रेम करते हो  मेरा सच्चा प्रेम तुम्हारे मन में  हर वक़्त उमड़ता रहता है और  मुझे पुकारता रहता है  याद करता रहता है  तभी तो मैं यहां  हर बार तुम्हें याद करती हूं  तुम्हारी बात करती हूँ  क्योंकि सच्चा प्रेम  हर कोई नहीं करता और  जो सच्चा प्रेम कर लेता है  उसका प्रेम अथाह हो जाता है  अनंत हो जाता है और अमर हो जाता है  और फिर ब्रह्मांड में गूँजता रहता है उनका नाम  जिसे लोग महसूस कर लेते हैं  अहसास में भर लेते हैं.. सीमा असीम  14,7,26

मेरा मन, तेरा मन हिंदी कविता

 कि मेरा मन बस तुम्हारी तरफ ही खिंचा चला जाता है  हर वक्त हर पल हर  क्षण  सिर्फ और सिर्फ तेरा ही नाम लिए चला जाता है  रात को जब आंख खुल जाती है और  पुकारने लगता है तुम्हें ही  किसी काम को करते समय  काम से मन हट जाता है  और  तेरा नाम ले ले कर पुकारता है मेरा मन  न जाने तुझे ही याद करता है  न जाने क्यों तुझे ही पुकारता है  न जाने क्यों खिंचा चला जाता है मेरा मन  तेरी ओर ही बार बार हर बार  जिस राह से तू गुजरा होगा  उस हर राह में तुम्हें भी मेरी ही  याद आई होगी  मेरी ही बातें याद आयीं होगी और  तूने भी मुझे पुकार लिया होगा   जोर से तो नहीं हाँ हल्के से ही  पुकारा होगा  हां तुमने मुझे जरूर अपने मन में गुनगुना लिया होगा  किसी गीत, ग़ज़ल या कविता की तरह  और ब्रह्मांड की ओर नजर उठाई होगी  और मुस्कुरा दिया होगा मन ही मन  सच कहूं यही तो प्रेम है  जो तुम से दूर रहकर भी  कभी कम नहीं हुआ  कमी भुला नहीं और  ना कभी इसमें जरा सा भी दूर होने का  अहस...
 कभी-कभी मुझे लगता है की दुनिया में कुछ भी सच नहीं है पर ही लिखा हुआ है बुरा लगता है कोई झूठा होता है झूठ बोलता है या फिर हर बार वही झूठ बोलता है जो पकड़ में आ जाता है क्योंकि सच जो होता है इतने भी झूठ बोल लिया जाए छुपता नहीं है सच हमेशा सच रहता है उसे अपने आवर्त से त दबा ही नहीं सकता क्योंकि कितना भी झूठ बोल लो सच सामने ही आ जाता है और अक्सर ऐसा होता है जो इंसान झूठ बोल रहा होता है उसका सच हमें पता होता है फिर भी हमें लगता है जो वह बोल रहा है वही सच है लेकिन सच हमेशा सच ही रहता है और झूठ हमेशा झूठ  कितना भी झूठ बोल लो सच सामने आ जाता है   भले ही दुनिया झूठ है लेकिन सच ईश्वर है जिस को कभी नकारा नहीं जा सकता, वह सच जो कभी झूठ हो ही नहीं सकता  ईश्वर है और सच भी है इस दुनिया में...

हिंदी कविता

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 जो मैं तुम्हें बार-बार याद करती हूं   मैं यूं ही तो नहीं तुम्हें स्मृतियों में रखती हूँ  कुछ तो बात होगी जरूर  कुछ तो इसका कारण है अन्यथा  मैं क्यों तुम्हें याद करूं  मैं क्यों तुम्हारी बात करूं  क्यों मैं तुम्हें लिखूं और  क्यों मैं तुम्हें पढ़ूं  मैं तुम्हें ही पढ़ती हूं  रात हो या दिन  हर पल में  हर क्षण में  सिर्फ मैं तुम्हें ही याद करती हूं  तुम्हारी ही बात करती हूं  मन ही मन तुम्हें दोहराती हूं और  फिर उसे कागज पर उतार देते हैं  की मन बहुत बेचैन है  कि मन को चैन ही नहीं है  एक पल भी  तुम्हारे बिना जीने को तैयार ही नहीं होता   जैसे जैसे रात गहराती जाती है  तुम्हारी याद और ज्यादा  और भी ज्यादा बढ़ती जाती है  यह अंधेरा मेरे मन को और जागृत कर देता है  और तुम्हारी यादों से रौशन कर देता है  तुम भी ऐसे ही करते होंगे  शायद तुम भी मुझे यूं ही याद करते होंगे  और मेरी रोशनी से जगमगाते रहते होगे   जैसे कि मैं तुम्हारी रोशनी से जगमगाती...

कविता

 मैं तो इन दिनों बहुत ही अचम्भे में हूं  मैं तुम्हें देखूं या तुम्हारे करतबो को  कैसे कर लेते हो  तुम ऐसे करतब  कैसे तुम फंसा लेते हो  कैसे तुम चल कर लेते हो और  कैसे तुम बिना निभाए  और सबको निभाने को  मजबूर कर देते हो  सच में कमाल हो   तुम जैसा कोई हो ही नहीं सकता इस दुनिया में  कुछ कहा है करने के लिए  मन ही नहीं है  बस सोचती रहती हूँ  कि यह कैसे कर पाते हो तुम   कैसे आखिर कैसे?? सीमा असीम  9,6,26