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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20

विलक्षण प्रतिभा के धनी एक अभिनेता की प्रेरणा दायी यात्रा

 मनोज बाजपेयी (जन्म: 23 अप्रैल 1969) हिंदी सिनेमा, तेलुगु और तमिल फिल्मों के एक प्रमुख भारतीय अभिनेता हैं । उन्होंने अपनी बहुमुखी अभिनय शैली के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं। 2019 में, उन्हें कला के क्षेत्र में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था मनोज बाजपेयी एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जोकि हिंदी सिनेमा के साथ-साथ तेलुगु और तमिल फिल्मों मे भी सक्रिय हैं। वह अपने एक्टिंग करियर मे अब तक दो नेशनल फिल्म अवार्ड और चार फिल्म फेयर अवार्ड जीत चुके हैं।  मनोज को फिल्म 'भोंसले' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के 67वां राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।  निजी जीवन  मनोज बाजपेयी का जन्म 23 अप्रैल 1969 को नरकटियागंज, बिहार में हुआ था। बाजपेयी बचपन से एक्टर बनना चाहते थे। मनोज ने अपनी हाई स्कूल तक की पढ़ाई बिहार के बेतिया जिले के के. आर. हाई स्कूल से की। 17 की उम्र में बाजपयी अपने गांव नारकाटिया से दिल्ली शिफ्ट हो गये। कॉलेज के दिनों में मनोज ने थियेटर करना शुरू कर दिया था। करियर  मनोज बाजप...
 एक लेखक होने से पहले हमने जी बचपन को जिया था उसे बचपन में ही तो हमें लेखक होने का यह हमारे लेखन को मजबूती प्रदान कर दी थी क्योंकि अगर हमने वह बचपन नहीं किया होता तो क्या आज में इस मकान तक पहुंचती या मैं इस तरह से रचनात्मकता को अपने जीवन में उतार लिया होता शायद नहीं क्योंकि हमारा बचपन ही हमारे पूरे जीवन की नींव तैयार करता है तो मुझे तो ऐसा लगता है कि मेरा बचपन सबसे प्यारा बचपन था हालांकि सबको अपना बचपन बहुत प्यार होता है और सबको अपने बचपन से प्यार होता है हर कोई अपने बचपन में वापस लौट भी जाना चाहता है लेकिन मेरा बचपन कुछ अलग था कुछ हटकर था और सबसे अच्छा था जब मैं छोटी थी तो मुझे एहसास हुआ कि मैं इतना अच्छी मां क्योंकि मैं अपने घर में सबसे छोटी थी मेरे बड़े-बड़े भाई बहनों की तो शादी भी हो गई थी और दो भाई मेरे हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे जब मेरी बड़ी दीदी की शादी हुई उसके बाद में पैदा हुई इसलिए मैं उनकी बेटी के सम्मानित थी मेरे जीजा जी मुझे अपने पिता समान लगते थे और मेरे मामा वह तो मुझे इस उम्र में बहुत खुश थी उन्हें ऐसा लगता था कि उनके बुढ़ापे की लाठी हूं मैं या मैं उनके जीवन मे...
 उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी 
 कुछ दिनों के बाद पीहू की सोसाइटी में स्विमिंग पूल बनने का काम शुरू हो गया अब तो पीहू बहुत खुश थी कि स्विमिंग पूल बनेगा तो वह अपना सपना पूरा करेंगे छोटी सी पीहू यह नहीं जानती कि यह स्विमिंग पूल बड़े लोगों का बन रहा था अभी तो छोटे बच्चों का थोड़े दिनों के बाद बनेगा लेकिन वह तो खुश थी कि उनको स्विमिंग करने को मिलेगा खैर एक दिन बड़ा वाला स्विमिंग पूल बनकर तैयार हो गया बहुत सुंदर सा नीला नीला पानी चल ऐसे ही मिलता-दूत चलता हुआ पीहू जब भी उधर से निकलती उनका मन करता कि वह स्विमिंग कर ले लेकिन वहां तो बड़े-बड़े लोग स्विमिंग कर रहे थे फिर कुछ दिनों के बाद बड़ी स्विमिंग पूल के पास में ही एक छोटा सा स्विमिंग पूल भी बन गया जो छोटे बच्चों के लिए था तो छोटी सी पीहू खुशी के मारे नाचने लगे आप तो उनका सपना पूरा होगा मामा उनको स्विमिंग सिखाएंगे किसी तरह से स्विमिंग पूल तो तैयार हो गया आप उनको एक ट्रेनर की जरूरत थी क्योंकि मम्मी को स्विमिंग भी नहीं आती पीहू की और पीहू के पापा को भी स्विमिंग नहीं आती तो सिखाए कौन फिर उनकी मम्मी ने एक दिन सोसाइटी ऑफिस में जाकर पता किया कि छोटे बच्चों को स्विमिंग सीखने ...

प्यार आ गया है

 मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है  ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है  जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था  पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे  आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है  जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ  जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं  जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम 
चोट जब दिल पर लगती है  दर्द तो होता ही है  कोई चिंगारी भड़कती है  शोला बनता ही है  क्या तुम मुझे इस तरह से रुलाओगे  देखना एक दिन तुम सिर पटकते आओगे  नहीं करुँगी माफ़ तुम्हें यह वादा है मेरा  गिरोगे जमीं पर बहुत गहरी चोट खाओगे  काश होता अगर जीवन में एक ख़ून माफ़  तो सबसे पहले तेरा कत्लेआम करती  फिर चौराहे पर तुझे खड़ा कर देती  बताती दुनिया को धोखेबाज की यही सजा है  कोई बच्चों का खेल नहीं प्रेम न सिर्फ मजा है  तबाह हो जाता है जीवन बर्बाद हो जाता है  जो  सच्चे प्रेम में इस तरह दग़ा खाता है  रो रो कर गुजारी है रातें दिन को न सकूं मिला  तूने आग जो जलाई है उसमें तुझे ही भस्म करना है 
 कुछ तो है तेरे मन में जो मुझे तेरी याद हर पल सताती है  कभी आंसू तो कभी मुस्कान तो कभी उदासी छा जाती है  रहे तू कहीं भी किसी के साथ पर मेरे साथ तो हर वक्त मेरे दिल में रहता ह  जैसे कोई परछाई सा संग संग फिरता है  क्यों इस कदर मुझे सताता है  तू खुद ही बता दे तेरा अब मुझसे क्या नाता है  तू क्यों पल भर को भी नहीं मुझे भुलाता है  जो हर पल तेरा ही नाम मेरे लफ्जों पर आता है  दिल में एक आग सी जलाता है  मानो तेरी मोहब्बत मुझमे पकती है और चटक चटक कर मेरे चेहरे पर किसी हीरे की तरह चमकती है गमकती है दमकती है    तू तो सब जानता है  जानकर भी अनजान बना रहता है  कुछ तो राज है जो तू हर पल मुझे याद आता है  कोई तो ऐसी बात है जो हर पल मुझे तेरी यादों की तरफ तेरी बातों की तरफ खिंचे लिए जाती है  किसी दिन तू आएगा जो खुद ही तो खिंचा चला आएगा और  मैं तुझे कह दूंगी नहीं चाहिए तू  जा अब तू अब तू क्यों आया है  सालों का इंतजार यूं ही मैं पल भर में ठुकरा दूंगी  जा तू अब मैं तुझे याद नहीं करूंगी लेकिन  तू ही बता क्...