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मोहे लगे प्यारे सभी रंग तुम्हारे कि पग पग लिए जाऊँ तेरी बलइयाँ .... तुम सुनो न , सुनते क्यों नहीं , क्या तुम्हें आवाज नहीं आ रही है , क्या तुम अब ऊंचा सुनने लगे हो शायद हाँ तभी तो तुम्हें न कोई आवाज आती है , न कोई अहसास होता है , हाँ तुम्हें कुछ भी महसूस नहीं होता है क्योंकि अगर तुम्हें महसूस हो रहा होता तो तुम न इतने दर्द देते , न ही दुख देते , क्योंकि जब हामरी आँखों में इतने आँसू भर दिये कि मुझे दिखना भी बंद हो गया , दुनिया से मोह ही खत्म हो गया कुछ भी अच्छा नहीं लगना , और खुद में ही खो जाना ,,, वैसे खुद में खोना या खुद को जीना ही ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान है ,,,, सीमा असीम 23,2,20
 कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...

और तुम

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 घने पेड़ों की छाँव हो  नदी का किनारा हो  थोड़ा सा सकूं हो और  हो थोड़े से सिर्फ तुम... सीमा असीम

चाँद

आती रही याद जिसकी सुबह से शाम तक  अरे वो तो चाँद है  जो छुप जाता है  सूर्य के उगते ही ||| सीमा असीम सक्सेना 
 गुजर जाता है वक़्त  पर वक़्त गुजरता नहीं  ठहर जाता मन वही  पर वहाँ से कभी हटता नहीं  अब तुम ही बताओ जरा  ऐसा होता है तो क्यों होता है  वैसा क्यों होता नहीं  जो चाहों वो पाओ  दिल क्यों अटका रहता है वहीं.... सीमा असीम  8,2,26

कहानी या किस्सा हूँ कोई

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 मैं तो बस एक कहानी  या किस्सा हूँ कोई   काश तुम भी  एक उपन्यास होते  किसकी कहानी   जो एक बार लिख दी गयीं  बस वही रहती है  कभी नहीं बदलती  जो लिख गई  सो लिख गयीं  क्यों हो गये तुम  एक अखबार से  जो बदल जाता है  हर बार  हर रोज  हर दिन.. सीमा असीम  1,2,26

न दुआ न बद्दुआ

रुला कर मुझे हँसने वाले  दुखा कर दिल मेरा खुश होने वाले   है हम तो अब ईश के सहारे  कि नहीं तू मेरी अब बद्दुआ के भी काबिल.. सीमा असीम  1,2,26

जो अपना है

 पा लिया तो क्या पाया  खो दिया तो क्या खोया  जो अपना है संग है सदा  दूर है जो तो क्या गया  याद किया, क्या याद किया  जो भुला दिया तो क्या भूला  जो रहता है अहसासों में  लौट आया तो क्या लौटा!! सीमा असीम सक्सेना  31,1,26