चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
पल भर को भी ज़ब अकेले में बैठती हूं सोचती हूं तो उदासी घिर जाती है क्या अपने के बगैर भी कोई जी सकता है क्या अपनों के बगैर भी कोई रह सकता है अगर अपने ना होते तो इस दुनिया में ना होती है खुशियाँ ना इतनी सुंदर होती दुनिया ना इतनी खूबसूरत होती ना इसमें इतना अपनापन होता ना इसमें कभी जीने का मन होता अपने है तभी तो जीवन है अपने हैं तभी तो खुशियां हैं अपने है तभी तो दिल लगा रहता है वरना उदासी है आंसू है दुख है दर्द है और कुछ नहीं अपनों के बिना दुनिया में कुछ नहीं अपनों से कभी बिछड़ कर देखो पल भर में तड़प जाओगे पल भर में लौट के आ जाओगे अपनों से बात करके मन को खुशी मिलती है मन भटकता नहीं है जो होते हैं अपने अपनों के जैसे तो नहीं भटकता है मन ना होता है कभी बेचैन है अपने है तो बस अपने अपने तो अपने होते हैं सीमा सीमा 6, 8, 20
अहसास भी बड़े कमाल के होते हैँ तुम जो नहीं कहते वो भी कह जाते हैँ कभी रुलाते हैँ जीभर के कभी मुस्कुराने को मजबूर कर जाते हैँ घृणा तो कभी द्वेष की भावना को दूर करते हुए मन में प्रेम को जगाते हैँ यह अहसास न होते तो कैसे आते जीवन में सच्चे भाव अहसास ही दुनिया में किसी को भी सही से इंसान की पहचान करना सिखाते हैं... सीमा असीम 11, 10, 20
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