राधिका ने काफी उठाई और पीनी शुरू कर दी बेटा एक और ग्राम कप कॉफी उसकी इमेज पर रखकर चला गया था हरप्रीत ने देखा राधिका फिर से काफी में मस्त है और बाहर के नजरों में तो उसका ध्यान फिर से सामने वाली टेबल पर चला गया जहां वह महिला अभी भी खाने में लगी हुई थी और उसकी वही नजाकत धीरे-धीरे चम्मच से लाल सिर्फ करती हुई दाल पीती हुई सब्जी का एक दो टुकड़ा बचा था उसे भी खाया लास्ट आखिर में खीरे का एक टुकड़ा उठकर मुंह में रखा फिर बेटा को बुलाकर कहा बेटा प्लीज बिल ले आओ और ही खाना यहां से उठा लो हरप्रीत ने देखा सारा खाना बच गया ही क्यों था उसे अपनी मैच की तरफ नजर डाली वहां पर बस थोड़ा सा आमलेट बचा था जो राधिका को खाना था उन लोगों ने तो बहुत थोड़ा सही मंगाया जब भी दो लोग खाने वाले थे और यह अकेली एक खाने वाली फिर इतना क्यों मनाया एक मन में हलचल सी मच गई उसके बारे में जानने के लिए इच्छा जागृत हो गई लेकिन कैसे वह तुमसे जानता ही नहीं कभी मिला नहीं कभी बात नहीं की तो ऐसे अजनबी से वह भी क्यों बात करेगी अच्छा भी तो नहीं लगता है ना किसी से ऐसे ही जाकर बोलने लगा बात करने लगा राधिका अभी भी कॉफी पी रही थी रतन ने हरप्रीत ने देखा की बेटा बिल दे गया था उसने वहां से सारी इमेज सामान समेट लिया और मेरे पर सौंफ रिफ्रेशमेंट की कुछ चीज रख कर चला गया महिला ने बेटा की दिलवाले फाइल में कुछ नोट दबा दिए और अपना पर्स उठाकर जाने लगे बेटा ने उसको बड़े चमड़ी से देखा इसलिए अपने पैसे भी वापस नहीं लिए मैं बस में कहना चाह कभी उसे मैडम ने कहा बाकी के तुम रख लेना बेटा को अच्छा खुशी महसूस से बेटा को अच्छा लगा बेटा बेटा ने कुछ नहीं कहा और काउंटर की तरफ चला गया वह महिला भी बाहर निकल गई धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर रेस्टोरेंट के बाहर निकल गई और पीछे छोड़ गई बहुत सारे अनुत्रित प्रश्न जिसे हरप्रीत जानना चाहता था
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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