अपने
पल भर को भी ज़ब अकेले में बैठती हूं
सोचती हूं तो उदासी घिर
जाती है
क्या अपने के बगैर भी कोई जी सकता है
क्या अपनों के बगैर भी कोई रह सकता है
अगर अपने ना होते तो इस दुनिया में
ना होती है खुशियाँ
ना इतनी सुंदर होती दुनिया
ना इतनी खूबसूरत होती
ना इसमें इतना अपनापन होता
ना इसमें कभी जीने का मन होता
अपने है तभी तो जीवन है
अपने हैं तभी तो खुशियां हैं
अपने है तभी तो दिल लगा रहता है
वरना उदासी है
आंसू है
दुख है
दर्द है और
कुछ नहीं
अपनों के बिना दुनिया में कुछ नहीं
अपनों से कभी बिछड़ कर देखो
पल भर में तड़प जाओगे
पल भर में लौट के आ जाओगे
अपनों से बात करके मन को खुशी मिलती है
मन भटकता नहीं है
जो होते हैं अपने अपनों के जैसे
तो नहीं भटकता है मन
ना होता है कभी बेचैन
है अपने है तो बस अपने
अपने तो अपने होते हैं
सीमा सीमा
6, 8, 20

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