पीहू हमारी
दौड़ी-दौड़ी फिरती है
पल भर नहीं ठहरती है
कभी पहनती लहंगा चुनरी
कभी फ्रॉक पहनती है
नाना नानी की बेटी रानी
दादा दादी की राज दुलारी
मम्मी पापा जान छिड़कते
घर भर को वह लगती प्यारी
इतनी सुंदर छोटी छोटी आंखें
ख्वाब चमकते उसमें रहते
होठों पर लाली प्यारी
बातों से लगती है वह कितनी प्यारी कितनी भोली
खाने में बड़े नखरे करती
खाना नहीं वो खाती
दूध को तो वह ना हाथ लगाती
चॉकलेट टॉफी लाइम जूस जेम्स पर फिसलती
कितना मनाओ कितना वहलाओ पर वह कभी किसी की बातों में ना आती
अभी तो बहुत छोटी है
1 दिन बड़ी बनेगी
पूरी दुनिया में नाम रोशन करेगी
सब को बहुत खुशी देगी
उससे प्यारी कोई नहीं है
सबसे प्यारी पीहू हमारी
सबसे न्यारी पीहू हमारी
सबसे सुंदर सबसे प्यारी
पीहु हमारी
पीहू हमारी
आज बेटी डे पर बेटियों के लिए प्रस्तुत है कविता
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