आस
मैं खुश हूँ बहुत खुश कल से ही
फिर क्यों रात को आँसू बहने लगे
प्रेम के रंग अजब हैं
सुख में आँसू
दुख में आँसू
प्रेम का सच्चा साथी है दुख
प्रेम में कभी कहाँ मिला है सुख
फिर एक आस मन में पल गयी है कि
दुख अब सुख में बदलेंगे
संग संग कुछ दूर चलेंगे
चिड़ियों सा मन चहक पड़ेगा
जीवन में जीवन जीने को मिलेगा
मन का उपवन महक उठेगा
पत्तों पत्तों और डाली डाली पर
सुंदर सा पंछी डोलेगा
मीठे फलों का स्वाद चखेगा
उसका मन कितना खुश होगा
सोच सोच कर मन मुसकाया
आँखों के कोरों पर सुंदर सुखद स्वप्न सजेगा
महक उठेगा खुशियों के पल में
सारा तन और सारा मन .......
सीमा असीम
15, 9, 20
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