शाश्वत है


 प्रेम शाश्वत है

 यूं ही तो नही कहा जाता कि प्रेम शाश्वत है

  प्रेम  को ना तो घटाया जा सकता है और 

ना ही मिटाया जा सकता है 

ना खत्म किया जा सकता है और 

ना ही मारा जा सकता है 

अगर प्रेम है 

तो ताउम्र प्रेम रहेगा कभी खत्म नहीं होगा 

ना कम होगा 

ना ज्यादा होगा

ना कभी स्वार्थी होगा 

ना कभी प्रेम झूठा होगा  

अगर प्रेम हुआ तो हुआ है

अगर  मन किसी का हुआ 

तो हुआ है 

 कभी मन को बदला नहीं जा सकता 

मन को कभी मारा भी नहीं जा सकता 

 प्रेम भरा मन कभी नहीं मरता 

एक जोत सदा जलती रहती है 

विश्वास की...... 

सच्चा प्रेम हमेशा प्रेम ही रहता है

 कभी भी बदलता नहीं

क्योंकि  प्रेम शाश्वत होता है 

सीमा असीम 

9,9,20 

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