प्रेम में


 

वे  दोनों में  प्रेम थे 
पर कहते नहीं थे कभी 
वे कभी  फूल भेजते  और कभी उपहार 
नए नये  नाम रचते एक दूसरे का 
वे  याद करते और बातें भी करते 
वे बार बार साथ चलने को आतुर होते 
एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर  
दिन गुजरते जाते आस बढ़ती जाती 
यूं ही दिन बीतते रहे 
वे खुद से ही हँसते मुस्कुराते बतियाते 
 बारिश में भीगते 
फूलों संग महकते 
ओस सा नम होते 
किसी पेड़ के तले बैठे रहते 
घंटों यूं ही सोचते हुए कि 
उन्हें इतना यकीन था 
वे मिलेंगे 
बार बार मिलेंगे 
मिलते रहेंगे 
सदियों तक 
फिर फिर बिछुड्ने को 
क्योंकि वे प्रेम में थे 
अद्भुत अनोखे सच्चे प्रेम में ......
सीमा असीम 
29,9,20 

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