तो मां की सुंदरता मिली थी और उम्र भी 16 साल तो उसकी रंगत अलग ही थी चेहरे पर रौनक लगी थी अर्चना का पति बना हुआ था और उसकी बेटी को भी फंसा था वह अपने नजरों से उसे दौड़ता रहता है और अच्छी-अच्छी बातें करता है चल तुझे ना एक नौकरी करवा देता हूं तेरा खर्चा भी निकलेगा और टाइम भी पास होगा क्योंकि मुझे बेटी के आ जाने से मां के साथ समय बताएं का मौका नहीं मिल पा रहा था बेटी बोली ठीक है उसने भी सोच अच्छा लगेगा बाहर निकलेगी घर से हालांकि अभी वह पढ़ाई कर रही थी 11वीं क्लास में भी अभी थी लेकिन सोचा चलो टाइम पास करने के लिए कर लेते हैं निकाल कर देने का काम क्यों कर दिया सेक्स करता है वह दोनों एक दूसरे को प्रेम करने लगी क्या कहेंगे यह तो एक आकर्षण मंत्र था और फिर कहते हैं गलत रास्ते पर चल रही होती है उसके कल बेटी में ए जाते हैं कि जैसे संस्कार मां के होते हैं जैसे की कुछ बच्चे अच्छे निकल जाते हैं और मां अच्छी हो कुछ बच्चे गलत निकल जाते हैं मुश्किल से 15 दिन हुए थे और 15 दिन में नहीं उसे टाइम से प्यार हो गया और उसकी दुकान पर मात्र वह चार बार ही गई होगी कुछ खरीदने बिंदी कभी नेल पॉलिश या लिपस्टिक से मिलने चलने लगे चल रहा था आराम से इधर मां का आधार बेटी का दोनों बड़े खुश रहते हैं पैसे आते बेटी भी खुश भाभी खुश और पति मतलब बेटी का बाप को आराम से नौकरी पड़ जाता है उसे किसी बात की कोई बालक है आंखें 2 महीने होने को आए अब उसकी बेटी को स्कूल खुलने वाले थे उसे वापस लाने के साथ जाना था लेकिन होते हैं अब उसे नहीं से प्यार हो गया नानी के साथ कैसे जा सकती थी क्या करें अर्चना के पति को सारी बातें बता दे क्या उसको बताइए तो सारा घर में क्लेश बना हुआ उसकी मां को पता चला उसके पापा को पता चला कि नहीं मुसलमान है हम तुम्हारी शादी नहीं कर सकते क्योंकि हम लोग पंडित मुसलमान का कोई जॉब लड़की तो बाबा समझ रहे थे लेकिन अर्चना के पति ने लड़की का साथ दिया और बोले नहीं प्रेम से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं मैं तुम्हें तुम्हारी प्रेम से मिलेगा और उसको रात के समय मन की जेवर आप के पैसे लेकर घर से भगा दिया उसने सोचा एक रास्ते का पता निकल गया इस तरह से सोचा होगा मम्मी और वह लड़की चली गई मुस्लिम के साथ उसकी शादी कर ली थोड़े दिनों तक घर में मां और उसके पापा परेशान रहे भाई भी आए कुछ दिन रहे ऑफिस वापस अपनी नानी के पास शुरू हो गया मुझे मौज मस्ती अर्चना इसी तरह से जी रही थी क्या कर सकती थी वह देख रही थी कि पति की हरकतें कहां की बेटी को भी गलत संगत का सट्टा पड़ जाए वह कितना करें कितना शादी कर देंगे लेकिन ऐसा कहना आसान होता है मन भी का तो रही थी लेकिन कल को जब बेटों की बातें सुनेंगे तो उन्हें भी अच्छा नहीं लगेगा वहां जाकर बेटी तब तक देखा पति और दंड हो गया था अपना दिन देखा ना रात दोनों साथ साथ रहते की तरह से अर्चना की बेटी है हाई स्कूल पास किया और उसको उन्होंने एक क्यूट में ट्रेनिंग करने के लिए शहर से बाहर भेज दिया उसके लिए थोड़ा तो पढ़ लिख जाए और वह ट्रेनिंग कंप्लीट करके
चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
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