नफरत से हम कभी भी प्रेम को नहीं जीत सकते
हमें प्रेम को जीतने के लिए प्रेम ही करना होता है और
जब हम प्रेम करने लगते हैं तो नफरत खुद ही
स्वतः ही खत्म हो जाती है
मिट जाती है और
हमारे जीवन में प्रेम को भर देती है
प्रेम एक ऐसा शब्द है जो फैलता है
खिलता है और कभी-कभी बिखरता भी है
लेकिन बिखर जाने के बाद उसे समेटना हमारे हाथ में होता है
अगर हम समेट लेते हैं तो हम भी सिमट जाते हैं
अगर हम बिखर जाते हैं
प्रेम को त्याग कर नफरत को अपना लेते हैं तो समझो कुछ नहीं बचा है जीवन खत्म है
इसलिए प्रेम का दामन कभी मत छोड़ाना
बस प्रेम करते रहो जब
आप प्रेम को पकड़े रहोगे तो
प्रेम आपको कभी नहीं छोड़ेगा
कभी अकेला नहीं करेगा
कभी आपके मन में नफरत नहीं भरेगा
ना कभी आपको दर्द देगा
क्योंकि प्रेम शाश्वत है अनंत है ईश्वर है
सीमा असीम
18,4,26
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