कुछ तो है तेरे मन में जो मुझे तेरी याद हर पल सताती है

 कभी आंसू तो कभी मुस्कान तो कभी उदासी छा जाती है 

रहे तू कहीं भी किसी के साथ पर मेरे साथ तो हर वक्त मेरे दिल में रहता ह

 जैसे कोई परछाई सा संग संग फिरता है 

क्यों इस कदर मुझे सताता है

 तू खुद ही बता दे तेरा अब मुझसे क्या नाता है 

तू क्यों पल भर को भी नहीं मुझे भुलाता है 

जो हर पल तेरा ही नाम मेरे लफ्जों पर आता है 

दिल में एक आग सी जलाता है 

मानो तेरी मोहब्बत मुझमे पकती है और चटक चटक कर मेरे चेहरे पर किसी हीरे की तरह चमकती है गमकती है दमकती है

   तू तो सब जानता है  जानकर भी अनजान बना रहता है

 कुछ तो राज है जो तू हर पल मुझे याद आता है 

कोई तो ऐसी बात है जो हर पल मुझे तेरी यादों की तरफ तेरी बातों की तरफ खिंचे लिए जाती है 

किसी दिन तू आएगा जो खुद ही तो खिंचा चला आएगा और

 मैं तुझे कह दूंगी नहीं चाहिए तू 

जा अब तू अब तू क्यों आया है 

सालों का इंतजार यूं ही मैं पल भर में ठुकरा दूंगी

 जा तू अब मैं तुझे याद नहीं करूंगी लेकिन

 तू ही बता क्या तेरे दिल में है और क्या तेरे मन में की तू हर वक्त मुझे याद आता है

 मेरे दिल में एक आग जलाता है और फिर आंखों से बह जाता है...

सीमा असीम 

22,4,26

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