कविता ❤️

 आजा रे अब मेरा दिल तुम्हें पुकार रहा है 

सच्चे मन से गुहार लगा रहा है 

 तुम तक मेरी आवाज तो पहुँच जाती होगी ना 

तुम्हें भी सोते-सोते नींद खुल जाती होगी ना 

और चौंक कर जग जाते होंगे ना और

 आसपास देखने लगते होंगे ना 

अपने बिस्तर को तटोल कर देखते होंगे ना 

शायद तुम्हें एहसास होता होगा कि 

मैं तुम्हारे पास नहीं लेटी हूं और 

तुम गुनगुनाने लगते हो लग जा गले से 

लेकिन तुम मुझे वहां नहीं पाते हो तो 

उदास हो जाते होंगे 

क्यों नहीं समझते 

तुम्हारे बिना उदासी का चोला ही पा लिया है मैंने

 तो अब आ जाओ या मुझे पुकार लो 

एक बार ही सिर्फ एक बार  ही 

सीमा असीम 

16,7,26

अपने सच्चे मन से...

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम

बारिश

ख्वाबों की दुनिया