कविता
मैं तो इन दिनों बहुत ही अचम्भे में हूं
मैं तुम्हें देखूं या तुम्हारे करतबो को
कैसे कर लेते हो
तुम ऐसे करतब
कैसे तुम फंसा लेते हो
कैसे तुम चल कर लेते हो और
कैसे तुम बिना निभाए
और सबको निभाने को
मजबूर कर देते हो
सच में कमाल हो
तुम जैसा कोई हो ही नहीं सकता
इस दुनिया में
कुछ कहा है करने के लिए
मन ही नहीं है
बस सोचती रहती हूँ
कि यह कैसे कर पाते हो तुम
कैसे आखिर कैसे??
सीमा असीम
9,6,26
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