भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की एक वरिष्ठ और दिग्गज चरित्र अभिनेत्री हिमानी शिव परी को हिमानी शिवपुरी को कौन नहीं जानता देहरादून में 2022 24 अक्टूबर 1960 को हिमानी का जन्म हुआ था वीक लगभग 4 दशक से बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे कुछ-कुछ होता है हम आपके हैं कौन और उसके अलावा टीवी के भी बहुत सारे यादगार सो हैं जिन्होंने जिसमें उन्होंने भूमिका निभाई है उनका जन्म देहरादून में 24 अक्टूबर 1960 को हुआ था और उनके पिता हरि दत्त भट्ट शैलेश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि है और हिंदी के शिक्षक भी दून कॉलेज में शिक्षक थे जहां से अमिताभ बच्चन ने भी पढ़ाई की मां शैली भट्ट जो की ग्रहणी है हिमांशी पुरी की शुरुआती शिक्षा दोनों स्कूल से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने दव कॉलेज देहरादून से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया थिएटर वह कॉलेज के दिनों से ही करने लगी थी क्योंकि उनकी नाटक करने में बहुत रुचि थी और इसलिए उन्होंने अपने पार्ट टाइम में कभी भी वह शाम को टाइम मिलता था तो वह थिएटर करती थी वह कहती थी कि वह कहती है कि जब स्कूल पढ़ाई करने के बाद जब एक घंटा वह थिएटर में काम कर लेती है तो उनका मन प्रसन्न हो जाता था लगता था कि मैं बहुत अच्छा काम किया है इसलिए वह पढ़ाई में बहुत अच्छी होने के बाद भी एसटी में एडमिशन लेने के लिए दिल्ली पहुंच गई हु आर यू कि उनको पढ़ाई करने के लिए विदेश में स्कॉलरशिप मिली थी तो सारे लोग घर में बहुत खुश थे कि चलो हिमानी का विदेश जाएगी और वहां से जाकर अपना पीएचडी कंप्लीट करेंगे उसके लिए एग्जाम देने के लिए दिल्ली गई थी उसी समय उन्होंने एसटी का भी नेशनल स्कूल आफ ड्रामा का एग्जाम भी दे दिया एडमिशन के लिए और वापस आ गई कुछ दिनों के बाद नेशनल स्कूल आफ ड्रामा से उनके पास लेटर है कि आपका सिलेक्शन हो गया है बहुत खुश नहीं लेकिन घर वालों को कैसे बताएं आखिर उन्हें तो विदेश जाने के लिए तैयारी हो रही थी फिर उन्होंने अपने घर में पापा से बताया कि पापा एक बार तो मौका ले लेना चाहिए क्योंकि मेरा मन बहुत है अगर मैं नहीं मां का किया तो जिंदगी भर यही अफसोस रह जाएगा मुझे कि मैं अपनी मां की बात इसलिए उनके पापा शैलेश जी बहुत ही अच्छी कवि हो साहित्य में रुचि रखने के साथ-साथ थिएटर की बातों को समझते थे उन्होंने सोचा कि ठीक है बेटा वह पापा उनके फेवर में हो गए और बाकी मां और परिवार में और सब लोग बहुत नाराज हो गए कि यदि ऐसा कैसे नहीं कर सकती तुम नहीं जाओगी तुम पीएचडी करने विदेश जो पर उनके मन में तो एसटी में ही दाखिला लेना था तो और उनकी किस्मत में भी लिखा था उनकी डेस्टिनी कि उन्हें वह कर रही थी आखिर उनके पापा ने कहा चलो तुम तैयार हो जाओ तुम नेशनल स्कूल आफ ड्रामा में ही तुम्हारा हम एडमिशन करा देते हैं आखिर वह दिल्ली पहुंची और उन्होंने एडमिशन ले लिया वहां पर उन्होंने साथ-साथ इसके वहां का जो पढ़ने का काम भी कर दिया वहां पर उन्होंने चौपी कर दी जिससे कि उन्हें घर वालों से पैसा ना लेना पड़े और वहां पर ही वह काम अपना पड़ती भी थी और साथ ही साथ पढ़ भी रही थी फिर उनको दूरदर्शन की धारावाहिक हम रही जिसमें देवकी भजई के रूप में था उसे उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कर दी इसके बाद अब आएगा मजा जो की 1984 में आया था इससे उन्होंने अपनी फिल्मों की शुरुआत की उनकी प्रमुख फिल्में सूरज बड़े आते और यशराज जी के साथ में बनी जैसे कि उसमें उन्होंने मां चाचा हुआ जैसे किरदारों को बहुत शानदार तरीके से निभाया उनके प्रमुख फिल्में तो 1994 में दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे राजा हीरो नंबर वन कुछ कुछ होता है कभी-कभी खुशी कभी गम में प्रेम की दीवानी हूं टेलीविजन और कैरियर उन्होंने टेलीविजन और फिल्म दोनों में साथ-साथ अपनी अभिनव की अमित शाह जोड़ी क्योंकि उनकी नस-नस में अभिनय समय हुआ था शुरू से थिएटर थिएटर करने की वजह से वह अभिनय में एकदम पक्की हो गई थी और बहुत ही अच्छा अभिनय चल रहा था उनका कर रही थी किसी भी पिक्चर में वह काम करती वह हिट हो जाती और फिर हप्पू की पलटन और टीवी के लोकप्रिय में उनके द्वारा कटोरी काटो अम्मा का किरदार दर्शन को बहुत पसंद किया अभी भी लोग पसंद करते हैं उनका व्यक्तिगत जीवन उन्होंने कश्मीरी पंडित और अभिनेता ज्ञान शिवपुरी से शादी की वर्ष 1995 में जब वह फिल्मों की फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थी तभी उनके पति का निधन हो गया अभी उनका एक बेटा है जिसका नाम कात्यान है और जो अभी फिल्म फिल्म बनाने के लिए और इसी में काम कर रहा है फिल्म लाइन से ही जुड़ा हुआ है वह अक्सर अपने अपने घर उत्तराखंड में जाती रहती है देहरादून जाती है फिर वहां से मसूरी जाती है और अपने बचपन की यादों को ताजा करती है वह कहती है कि उत्तराखंड में लोग पलायन कर रहे हैं इसलिए बहुत बड़ी समस्या है इसी से रोकने के लिए वह बराबर प्रयास भी कर रही है अब मसूरी की ठंडी और उन्हें लगता है कि इसकी पवित्र हवा में एक अलग तरह का शगुन है जो उन्हें यहां लाकर एकदम सुकून से खुशी से भर देता है और उनके मन में एक नई ऊर्जा का संचार हो जाता है इस वजह से वह बार-बार मसूरी देहरादून आती रहती है कि मसूरी में उनके पैतृक घर है और यहां से बचपन की उनकी बेशुमार यदि जुड़ी हुई है उनके पिता शैलेश भट्ट को याद करते हुए अक्सर कहती है कि वह बहुत प्रसिद्ध साहित्यकार लेखक और शिक्षक थे उन्होंने लोक कलाकारों को मंच दिया और आकाशवाणी से जोड़ने में भी मदद की उन्होंने अपने पैतृक गांव को गोद ले लिया है और वहां विकास कार्य में लगी हुई है उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोक कलाकार लगातार राज्य की संस्कृति को बढ़ाने का काम कर रहे हैं उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान मिलना चाहिए भविष्य में उत्तराखंड की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता पर एक फिल्म भी बनना चाहती है किसके लिए वह लगातार प्रयासरत है हालांकि हिमानी शिवपुरी अभी भी का फिल्मों में और धारावाहिकों में व्यस्त होने काम की कोई कमी नहीं है
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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