है प्रेम जो तूने मुझे दुख दिया

 जो तूने मुझे कष्ट दिया

 जो तूने मुझे तकलीफें दी

 उसके लिए तो क्या ही कहा जाए

 उसे तुम्हें कभी नहीं कह सकती 

उसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता

 लेकिन बस इतनी ही दुआ करती हूं

 तेरे लिए की तुझे दवाइयां तो मिले 

लेकिन दर्द ना मिले तुझे कोई

 तू सब कुछ देखे लेकिन तुझे देखने के लायक कोई अच्छा दृश्य ना मिले 

तुझे नींद आए लेकिन कोई सपना ना आए

 तुझे गीत तू सुन लेकिन तू कोई धुन ना बन पाए 

तुझे नाव तो मिले 

तू नाव में बैठे 

नाव में घूमें 

नाव में सैर करें लेकिन 

तुझे कभी नदी ना मिले

 तेरे ऊपर प्रेम के कोर ही कोर बरसते रहे 

कोड़े तो बरसे लेकिन तेरी पीठ पर एक भी नीला निशान ना मिले

 कि तू मेरे दर्द को क्या समझेगा 

कैसे समझ सकता है कि

 कभी दरवाजे को पकड़ के रोना

 कभी पेड़ पौधों को चिपक चिपक के बातें करना

 रोना उनसे अपने दुख दर्द को कहना

 फूलों के साथ बतियाना 

लेकिन तू कहां समझेगा यह सब 

इसीलिए तुझे बस यही है कि तुझे कभी नदी ना मिले तुझे नाव तो मिले घूमने को 

नदी ना मिले 

तुझे कोई अच्छा दृश्य ना मिले देखने को

 तुझे कोई सपना ना मिले 

 कभी कोई सपना ना देख पाए 

ना तुझे कोई दर्द मिले 

ततू बिल्कुल सपट जीवन जिए

 जा तुझे मेरा यही श्राप है

 तुझे मेरी यही गलियां है 

 बस इसी तरह से जिये निरर्थक जीवन

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