मेरा विश्वास - फिर से

 मेरा विश्वास - फिर से

जब तुमने मेरा विश्वास तोड़ा,

मेरा विश्वास दुनिया से ही उठ गया।

जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा,

मैंने दुनिया से ही नाता तोड़ दिया।


विश्वास तो वो पूँजी थी मेरी,

जो सिर्फ़ तुम्हारे नाम की थी।

पर तुम उसके लायक ही नहीं थे,

ये बात देर से समझी थी।


मैं छली गई थी, ठगी गई थी,

लड़खड़ा कर वहीं गिर पड़ी थी।

फिर धीरे-धीरे, अकेले ही,

मैं खुद ही खुद से चल पड़ी थी।


फिर मेरा विश्वास खुद जगा,

मेरा मनोबल फिर से बढ़ा।

मैं अपने ही आत्मबल से

फिर से खड़ी हो गई।


ये सोचकर कि -

अभी भी विश्वास बाकी है इस दुनिया में।

सीमा असीम 

5,8,26

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