सावन ने छुआ तो लगा,

मैं खुद से मिली हूँ थोड़ा।


न भागम-भाग, न कोई हिसाब,

बस बूंदों संग बहता एक ख्वाब।


बाहर बारिश, अंदर मैं,

यादें भीगीं, मुस्कान भी नम।

पर दिल को आज बुरा नहीं लगा,

ये भीगना भी कितना कम।


मैंने कहा मन से -

इतना भी मत सोच,

कभी-कभी बस बरस जाने दे,

हर बात का मतलब मत खोज

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