जब तुम कहते हो मैं हूँ न"

 "जब तुम कहते हो मैं हूँ न"


जब तुम कहते हो मैं हूँ न,

तो डर भी ठहर जाता है।

तूफ़ान भी रुक कर पूछता है,

अब किसे डराना है।


जब तुम कहते हो मैं हूँ न,

तो अकेलापन भाग जाता है।

एक तुम्हारे होने से ही,

सारा जहाँ पास आ जाता है।


जब तुम कहते हो मैं हूँ न,

तो थका हुआ मन भी मुस्कुराता है।

जैसे किसी सूखे पत्ते पर,

पहली बारिश का बूँद गिर जाता है।


बस यूँ ही कहते रहा करो,

मैं हूँ न... मैं हूँ न...

तुम्हारे इसी एक शब्द में,

मेरा हर जन्म सँवर जाता है।

सीमा असीम 

6,8,26

Comments

Popular posts from this blog

पहाड़

मुस्कुराना