प्रेम शाश्वत है यूं ही तो नही कहा जाता कि प्रेम शाश्वत है प्रेम को ना तो घटाया जा सकता है और ना ही मिटाया जा सकता है ना खत्म किया जा सकता है और ना ही मारा जा सकता है अगर प्रेम है तो ताउम्र प्रेम रहेगा कभी खत्म नहीं होगा ना कम होगा ना ज्यादा होगा ना कभी स्वार्थी होगा ना कभी प्रेम झूठा होगा अगर प्रेम हुआ तो हुआ है अगर मन किसी का हुआ तो हुआ है कभी मन को बदला नहीं जा सकता मन को कभी मारा भी नहीं जा सकता प्रेम भरा मन कभी नहीं मरता एक जोत सदा जलती रहती है विश्वास की...... सच्चा प्रेम हमेशा प्रेम ही रहता है कभी भी बदलता नहीं क्योंकि प्रेम शाश्वत होता है सीमा असीम 9,9,20
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
अब तुम ही बताओ मुझे कि कैसे दूर जाएँ हम तुमसे जहाँ भी जाती हूँ तुम वहीँ पर आ जाते हो जिस किसी को देखूं तुम ही दिख जाते हो और तो कोई नजर आता नहीं है सिवाय तुम्हारे सिर्फ तुम ही तुम तुम फूलों में पत्तों में पौधों में हर जगह पर बस तुम्हारा ही अक्स जागती आँखों में भी और सोने के बाद ख़्वाबों में भी क्यों नहीं जाते तुम पल भर को भी मुझसे दूर क्या तुम्हें मैं इस कदर याद आती हूँ कि हर वक्त मन मस्तिष्क में चिपके रहते हो या यूँ कहें कि बादलों की तरह मुझ पर छाये रहते हो आकाश की तरह झुके रहते हो बारिश हो जाए गर कभी तो हर बूंद में तुम ही तो होते हो और खिंच लेते हो यूँ चुम्बक की तरह मुझे बारिश में भीगने के लिए और कर देते हो मुझे तरबतर अपने ही अक्स से तब सुनो मैं मैं नहीं रहती मैं तुम बन जाती हूँ सिर्फ तुम ही तुम मैं कहीं भी नहीं ......... सीमा असीम सक्सेना १६,६,२२
Comments
Post a Comment