अब मैं खुद से प्यार करती हूँ
अब मैं किसी से शिकायत नहीं करती,
जो जैसा है, वैसा स्वीकार करती हूँ।
अब आँखों में आँसू नहीं, सपने रखती हूँ,
टूटे दिल से भी हँसना सीख गई हूँ।
जो चले गए, उन्हें जाने दिया,
जो हैं, उन्हें दिल से अपनाया।
अब मैं खुद की सबसे अच्छी दोस्त हूँ,
अपनी ही रोशनी में सबसे ज्यादा रोज़ हूँ।
क्योंकि मैंने समझ लिया है -
खोकर ही पाया जाता है,
और टूटकर ही बनना आता है।
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