आज की बात
आज मैंने फिर खुद को याद दिलाया,
कि ताज सिर पर हो तो ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है।
मैं बिना मेहनत के कुछ नहीं चाहती।
जो मिलेगा, अपनी लगन से मिलेगा।
थकूँगी, पर रुकूँगी नहीं।
मैं सिर्फ़ एक नाम नहीं,
मैं एक कोशिश हूँ, जो हर दिन बेहतर हो रही है।
• सीमा
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