उसका झूठ


झूठ भी कितना सच्चा बोला था उसने,

कि हमने सच को भी झूठ मान लिया।


कहता था — तुम सी हो,

तुम्हारे बिना मर जाऊँगा।

आज देखो,

हमारे बिना भी जी रहा है,

और हम उसी झूठ पर आज भी जी रहे हैं।


उसके झूठ में भी एक अदा थी,

सच से ज्यादा मीठी सदा थी।

हम लुट गए उस सदा पर,

और वो जीत गया अपनी अदा पर।


अब किसी के सच पर भी

यकीन नहीं आता,

जब से उसका झूठ

सबसे हसीन लगा था।

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