तीज का त्यौहार आया,
सखी, साजन का पैगाम लाया।
हरी-हरी चूड़ियाँ खनकी,
मेहंदी से गोरी हथेली महकी,
झूले पड़े नीम की डाली पर,
गोरी झूले, गीत गाए मतवाली पर।
सावन ने भी चूनर ओढ़ी,
बादलों ने भी बिंदिया जोड़ी,
धरती दुल्हन सी सजी है आज,
देखो तीज का कितना है नाज़।
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