देवदार तले"
घने पेड़ों की छाँव या देवदार तले,
चलें वहाँ जहाँ दुनिया ज़रा ठहरे।
न शोर हो, न कोई जल्दी हो,
बस तुम्हारा हाथ, मेरा हाथ हो,
और हवा में हमारे किस्से बिखरे।
देवदार की खुशबू में लिपटा हो वक्त,
और हम भूल जाएं, क्या खोया, क्या पाया,
घने पेड़ों की छाँव तले,
बस एक पल, जो सिर्फ हमारा हो।
सीमा असीम
9,8,26
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