वो मेरा था, पर मेरा न हुआ


वो मेरा था, पर मेरा न हुआ,

एक ख्वाब था, जो पूरा न हुआ।


उसकी हँसी मेरी सुबह थी,

उसकी बातें मेरी शाम थीं,

पर उसकी मंज़िल कोई और थी,

हम तो बस रास्ते में मिले थे।


मैंने उसे अपना जहाँ माना,

उसने मुझे एक पल भर माना।

मैंने उसके लिए दुआएँ लिखीं,

उसने मेरी दुआओं को कभी पढ़ा ही नहीं।


शिकायत नहीं है उससे आज भी,

प्यार तो अपना काम कर गया।

उसने जाना नहीं, पर मैंने तो

प्यार करना सीख लिया।


वो मेरा था, पर मेरा न हुआ,

पर उससे जो प्यार किया,

वो हमेशा मेरा ही रहा।

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