काश एक ऐसा शब्द जो हर किसी के मन में एक बार जरूर आता है मेरी मां में आता था मैं बार-बार इस शब्द को लिखती थी काश ,?
जब एक बार तुमने इस शब्द को मेरी रचना में देखा तो तुमने कहा था एक कांच क्यों हटा दो काश उसे दिन के बाद मैं किसी भी रचना में काश लिखना छोड़ दिया था कभी लिखने का मन भी करता तो तुम्हारी बात याद आ जाती थी और मैं उसे नहीं लिखती थी, पर आज तो मेरा मन कर रहा है कि मैं इस शब्द को लिखूं कि काश , तुमने मुझे ना कहा होता काश मत लिखो, या मैं तुम्हारी बात ना सुनी होती नहीं मानी होती तुम्हारी बात....
सीमा असीम
Comments
Post a Comment