प्रेम जब मन में उतर आता है...
तो घंटी नहीं बजती,
बस अंदर कहीं बहुत धीरे से
एक रोशनी जल जाती है,
और तुम रोज़ के वही काम
थोड़े ज़्यादा मन से करने लगते हो।
तब आईने में चेहरा वही रहता है,
पर आँखों में कोई और झांकने लगता है,
गुस्सा थोड़ा देर से आता है,
और माफ़ करना थोड़ा जल्दी आ जाता है।
प्रेम जब मन में उतर आता है,
तो तुम किसी को पाना नहीं चाहते,
बस ये चाहते हो कि
जिस वजह से मन इतना हल्का है,
वो वजह कहीं
उदास न हो...
सीमा असीम
10,8,26
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