आज मौसम की पहली बारिश हुई तेज हवाएं चली और बदल ले आई कल घने पानी भरे हुए बादल चले आए लहराते हुए मचलते इतराते और इठलाते हुए बरस गए झूम कर और भिगो गए मेरा मन तब याद आए तुम बहुत याद आए क्या तुम बारिश बन कर चले आए मुझे भिगोने के लिए आंगन को गीला करने के लिए हां तुम ही तो थे जो बारिश बनकर आए और छूकर बरस कर दुखी मन को सुख में बदल गए मौसम की बारिश और तुम याद आए सीमा असीम 24,4,24
तन के बंधन तो तोड़े जा सकते हैं पर मन के बंधन कोई कैसे तोड़ सकता है भला जो रिश्ते आत्मा से जुड़ जाते है उन पर जन्म या मृत्यु का कोई प्रभाव कहां पड़ता है जोड़े है हमने आपस में आत्मा से आत्मा के तार एक तार खींचता है तो दूसरे को महसूस होता है दूसरा अगर जोर से खींचता है तो पहला दर्द से भर जाता है आत्मा का बंधन है हां सच्ची आत्मा का सच्चा बंधन.. असीम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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