हम ऐसे ही"


गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए,

कभी रूठे तो, बिना बोले मनाए।


न कोई दिखावा, न कोई बनावट,

बस तुम हो, मैं हूँ, और थोड़ी शरारत।


कभी चुप्पी में भी बातें हो जाएं,

गले लगे कभी, हँसे मुस्कुराए

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