"पहाड़ बुला रहे हैं"
वो पहाड़, वो वादियाँ बुला रही हमें,
कह रही हैं - आओ, थोड़ा साँस तो लो।
जहाँ बादल झुक के कानों में कुछ कहें,
जहाँ रस्ते भी हमें देख के मुस्कुराएँ।
चलो ना, वहीं जहाँ,
तुम मैं हो जाएँ, और मैं तुम,
वो पहाड़, वो वादियाँ,
सच में बुला रही हैं हमें।
सीमा असीम
9,8,26
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