तुम्हारे बिना
सच कहो कि जीवन क्या है तुम्हारे बिना,
धड़कन तो चलती है, पर धड़कने का मजा नहीं।
सच कहो कि शामें कैसी हैं तुम्हारे बिना,
दिया तो जलता है, पर उजाले का मजा नहीं।
सच कहो कि मैं क्या हूँ तुम्हारे बिना,
नाम तो मेरा है, पर पहचान का मजा नहीं।
तुम हो तो जीवन है, तुम हो तो जहान है,
तुम नहीं तो इस जीवन का कोई निशान नहीं।
सीमा असीम
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