तन के बंधन तो तोड़े जा सकते हैं पर
मन के बंधन कोई कैसे तोड़ सकता है भला
जो रिश्ते आत्मा से जुड़ जाते है
उन पर जन्म या मृत्यु का कोई प्रभाव कहां पड़ता है
जोड़े है हमने आपस में
आत्मा से आत्मा के तार
एक तार खींचता है तो दूसरे को महसूस होता है
दूसरा अगर जोर से खींचता है
तो पहला दर्द से भर जाता है
आत्मा का बंधन है
हां सच्ची आत्मा का
सच्चा बंधन..
असीम
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