करीब

तुम्हारे दुख में

 मैं दुखी हो जाती हूं और

तुम्हारे सुख में सुखी होती हूं

 चाहे तुम दूर रहो या पास रहो

 मैं होती हूं हमेशा तुम्हारे ही साथ

 किसी ना किसी बहाने से

यादों में बसा कर

मैं तुम्हारे करीब हो जाती हूं

 पुरानी यादों को सीने से लगाकर

 बहुत पास आ जाती हूं

 दूर होकर भी कहां दूर रहती हूं

 मैं सिर्फ तुम्हारे पास होती हूं

 जैसे फूलों से खुशबू कभी दूर नहीं होती

 इंद्रधनुष से रंग 

 वैसे ही मैं तुमसे अलग होकर भी

अलग कैसे हो सकती हूं

 क्योंकि अगर मैं फूल हूं

 तो तुम खुशबू हो

 अगर तुम धनुष हो

 तो मैं रंग

 बस हम आपस में

इसी तरह से गुथे हुए हैं

फूल रंग और खुशबू की तरह

 तो दूर रहकर भी करीब और

 करीब रहकर भी करीब ही होते हैं...

 सीमा असीम 

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