अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा खुश रहना
तुम्हारा मुस्कुराना
और बेपरवाह होकर खिल खिलाना
तुम तो जानते हो ना
तुम्हारी खुशी के लिए
कितनी दुआएं
मन्नतें और सजदे किए
न हो तुम्हें कभी कोई तकलीफ
दुःख या दर्द इ
सके लिए हमेशा परवाह की
तुम समझो ना समझो
मैंने तो सच्चे मन से
निस्वार्थ भावना से किया
जो मुझे सही लगा
वही सब किया
प्रार्थना में सिर्फ तुम्हारा नाम शामिल किया
कुछ भी कभी कोई गलत किया ही नहीं
अगर तुम गलत समझ बैठे
तो क्या फर्क नहीं पड़ता
मेरा मन जानता है सच्चाई
और वो रब
जो ऊपर बैठा सब देख रहा है
वह भी सब जानता है
मैं हमेशा निर्दोष हूं
थी और रहूंगी भी
कभी बिना दोष के भी सजा मिल जाती है
सजा देने वाला क्या निर्दोष है
जो बिना किसी दोष के भी सजा देता है
उसे किसी भी पल चैन नहीं पड़ता
इसलिए तुम खुश रहो
बाकी उस रब पर छोड़ दो
जो होगा अच्छा ही होगा
क्योंकि जो भी होता है
अच्छे के लिए ही होता है
हमारे भले के लिए ही होता है...
सीमा असीम
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