किशोरी आँखों में जो एक सपना जगा था,

वो आज भी इस दिल में वैसा ही सजा है।


वो पहली धड़कन, वो पहली सी लकीर,

समय बीता, पर न मिटी वो तस्वीर।


लोग कहते हैं इश्क़ उम्र देखता है,

पर इश्क़ तो बस दिल में ही बसता है।


वो किशोरी आज भी कहीं भीतर रहती है,

तेरे नाम की माला आज भी कहती है।


शेष फिर क्या बचा? बस यही तो बचा है,

प्रेम... जो हर जन्म में सिर्फ़ तेरा ही रहा है।

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम

बारिश