कविता ❤️

 पुकारो ना मुझे 

थोड़ा जोर से पुकारो 

शायद तुम्हारी आवाज 

मुझ तक नहीं आ पा रही 

पुकार तो रहे हो तुम 

लेकिन तुम हल्के हल्के पुकार रहे हो 

बहुत धीमे-धीमे 

तुम्हारी आवाज निकल रही है 

थोड़ी जोर से आवाज निकालो 

जिससे मेरा तन मन झंकृत हो जाए 

रोम रोम खिल जाए और 

मां महक जाए 

प्रेम के सागर में गोते लगाकर निखार जाए 

क्या तुम नहीं जानते 

प्रेम कभी कम नहीं होता 

वह तो बढ़ता ही जाता है 

दूर रहो या पास 

उसमें कोई अंतर नहीं आता 

प्रेम तो मन में रहता है 

क्योंकि प्रेम ना कम होता है 

ना प्रेम ज्यादा होता है 

प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है...


सीमा असीम 

17,7,26

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