सीमा असीम का साक्षात्कार

 सीमा असीम का साक्षात्कार जो अंतराष्ट्रीय पत्रिका अनुस्वार में प्रकाशित हुआ है ...आभार

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1. सीमा जी साहित्य सृजन में आपकी रुचि कैसे उत्पन्न हुई? किस साहित्यकार से आपको लिखने की प्रेरणा मिली?

उत्तर अपने भावों और अपने विचारों को सुसम्बद्ध तरीके से लिख देना कोई आसान काम नहीं है, लिखना एक गहन प्रक्रिया है, जो धीरे-धीरे आती है और उसके लिए आपको बहुत लगन के साथ में तपस्या करनी पड़ती है तभी आप अच्छे से लेखन कर सकते हो । मुझे लगता है कि भाव और विचार तो जब बच्चा समझदार हो जाता है तभी उसके मन में आने लगते हैं लेकिन तब वह लिख नहीं पाता । ऐसा ही मेरे साथ भी था । जब मैंने थोड़ा थोड़ा लिखना पढ़ना सीख लिया था तो मैं लिखने लगी थी हालांकि मेरे मन में बहुत सारे विचार उमड़ते घुमड़ते रहते थे, अंतर्मुखी स्वभाव होने की वजह से मैं ज्यादा बोलती तो नहीं थी पर मैं चीजों को लिख देती थी फिर मैंने नंदन चंपक जैसी पत्रिकाओं के लिए छोटे-छोटे से लेख, कविताएं लिखकर भेजती थी। जहां तक साहित्य लिखने की प्रेरणा की बात है तो मैं कई साहित्यकारों से प्रेरित हुई और मैंने उनसे प्रेरणा ली, कोई एक ऐसा साहित्यकार नहीं है जिसका मैं नाम दूँ ।  

2. आपकी पहली रचना क्या थी और कब प्रकाशित हुई थी सीमा असीम जी ?

उत्तर मुझे बहुत अच्छे से याद है, मेरी पहली रचना एक कहानी थी जो दिल्ली प्रेस की पत्रिका में प्रकाशित हुई थी उसके लिए मुझे मनीआर्डर से मानदेय भी आया था मैंने उन पैसो को बहुत दिनों तक संभाल के अलमारी के लॉकर में रखा था । यह 1995 में प्रकाशित हुई थी फिर उसके बाद में मेरी रचनाएं साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होनी शुरू हो गई थी, सबसे पहले कादंबिनी में, उसके बाद परी कथा,  कथाक्रम, कथादेश, अमर उजाला, दैनिक जागरण और साहित्यिक संस्थान की पत्रिकाओं में आदि इस तरह अनेकों साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं ।

3. साहित्य की किस किस विधा में आपने काम किया है? और किस विधा में आपकी रुचि सर्वाधिक है?

उत्तर ...मैंने साहित्य की अधिकतर सभी विधाओं में काम किया है गीत, गजल, मुक्त कविता , लघु कहानी, लंबी कहानियाँ, व्यंग्य, आलेख, उपन्यास आदि। और  इस वक्त मेरी सबसे ज्यादा रुचि उपन्यास लिखने में है । मैं जितना लिखती हूँ मुझे लगता है कम है । अभी मुझे बहुत कुछ अच्छा लिखना है शायद मैं कोई कालजयी रचना लिख दूँ ।

 

4. सीमा असीम जीआपने कविता और कहानी में

चुनाव कैसे किया?

उत्तर कविता और कहानी में चुनाव करने वाली कोई बात ही नहीं है दरअसल मैं अभी भी कविताएं लिखती हूँ। जब कभी मेरे मन में भाव उमड़ पड़ते हैं और मुझसे संभलते नहीं तो मैं उस समय कविता लिख देती हूँ क्योंकि कविता लिखने के लिए मुझे बहुत लंबी सोच विचार नहीं करनी पड़ती वह अपने आप से मन के अंदर से आती है । मेरी कविता दिल से निकलती है और कहानी उसके लिए थोड़ा समय लगता है । कोई घटना मुझे उद्वेलित करती है और लगातार मेरे मन में चलती रहती है जब तक उसे लिख न दूँ ।

5. आपका रचना संसार बड़ा व्यापक है?कृपया अपनी कृतियों का उल्लेख करे।

उत्तर ....ना जाने कौन सी प्रेरणा है जो मुझे प्रेरित करती है और मुझसे लिखाती चली जाती है मैंने अभी तक करीब 15 किताबें लिखी हैं,  जिसमें दो कविता संग्रह व चार कहानी संग्रह और चार उपन्यास पब्लिश हो चुके हैं और अन्य किताबे अभी प्रकाशित होनी हैं । उसके अलावा कई साझा संकलन के लिए रचनाएँ लिखी हैं । मातृभारती, प्रतिलिपि और अन्य कई डिजिटल ऐपस पर मेरी कहानियाँ, कवितायें आदि आती रहती हैं ।

 6. सीमा असीम जी आप अपने रचनाओं में विषय वस्तु कैसे चुनती हैं?

उत्तर.... मैं अपनी रचनाओं की विषय वस्तु अपने अनुभव से चुनती हूं जो मैंने देखा समझा और महसूस किया।  अधिकतर वही सब मेरी रचनाओं में शामिल होता है

 7. क्या आपके पात्र वास्तविक जीवन से जुड़े होते हैं या काल्पनिक होते हैं? आपका सबसे प्रिय पात्र कौन सा है?

उत्तर ...मेरी रचनाओं के पात्र जो होते हैं कुछ वास्तविक और कुछ काल्पनिक। वे पूरी तरह से वास्तविक नहीं होते हैं और ना पूरी तरीके से काल्पनिक होते है । मेरा सबसे प्रिय पात्र राशि है,  जो मेरे पहले उपन्यास अडिग प्रेम का नायका है।

 

8. आपकी रचना प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले मूल तत्व क्या है ।

उत्तर ... मेरी रचना को प्रभावित करने वाले मूल तत्व अधिकतर प्रेम ही होता है और अब मैंने सामाजिक समस्याओं को भी मूल तत्व के रूप में लेना शुरू कर दिया है।

 

 

9. सामाजिक परिवेश और उसमें होने वाले परिवर्तनों से आपकी रचनाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर ...मेरी रचनाएं अधिकतर जो सामाजिक परिवेश है उसी से ही संबंधित होती हैं तो जो परिवर्तन होते हैं या जो हो रहे हैं उनका प्रभाव मेरी रचनाओं में मिलता है । अभी मैंने एक उपन्यास लिखा है मन्नत उसमें लॉकडाउन से संबंधित समस्या को लिया गया है ।

 10. आप अपनी कौन सी रचना को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं?और क्यों?

उत्तर...  मुझे नहीं लगता कि मैंने अभी तक कोई सर्वश्रेष्ठ रचना की है।  मैं अभी कोशिश कर रही हूँ और मुझे अपनी सभी रचनाएँ श्रेष्ठ लगती हैं । मैं चाहती हूं कि एक सर्वश्रेष्ठ कालजयी रचना लिखूँ  और हो सकता है मैं आने वाले समय में लिख सकूँ ।

 11. आजकल लेखकों द्वारा काफ़ी कुछ लिखा जा रहा है किन्तु पाठक उतना प्रभावित नहीं हो पा रहा । आपकी द्रष्टि में इसका कारण है?

उत्तर .... बहुत कुछ लिखा जा रहा है, बहुत अच्छा लिखा जा रहा है लेकिन पाठक उतना प्रभावित इसलिए नहीं हो पा रहा है कि जो रचना जिस पाठक वर्ग को ध्यान में रखकर लिखी गयी है वो उस पाठक तक वो नहीं पहुंच पा रही है । इसका एक मुख्य कारण यही हो सकता है और मुझे यही लगता भी है।

 12. डिजिटल युग मे आपको साहित्य का क्या भविष्य प्रतीत होता है?

 उत्तर ... जहां तक मुझे लगता है कि आने वाला भविष्य डिजिटल युग का ही होगा लेकिन किताबों का समय कभी भी खत्म नहीं होगा वो हमेशा बनी रहेंगी भले ही डिजिटल युग जाए । हाँ आने वाला समय डिजिटल युग के लिए काफी अच्छा रहेगा।

 

13. प्रवासी हिन्दी साहित्य की समृद्धि के लिए आपके क्या विचार है ?

उत्तर .... प्रवासी हिंदी साहित्य की समृद्धि के लिए यही विचार हैं कि जो हमारे हिंदी भाषी लोग विदेशों में रहते हैं और वह लिख रहे हैं उनके पास दो तरह के कल्चरल हैं और उनके पास अनुभव भी बहुत है अतः उनकी रचनाओं को मुख्य रूप से छापना चाहिए ताकि उनका मनोवल बना रहे ।

14. लेखन कार्य के अलावा

आपकी अन्य अभिरुचियाँ क्या हैं?

उत्तर लेखन कार्य के अलावा मेरी सबसे ज्यादा रुचि घूमने में है । नए नए स्थानों पर जाना, पहाड़ों और प्रकृति के बीच रहना । मुझे पढ़ने का भी बहुत शौक है । जब मैं लिख नहीं रही होती हूँ, तो मैं पढ़ रही होती हूँ, या सोच रही होती हूँ या फिर कहीं घूम रही होती हूँ ।

15. उदीयमान लेखकों के लिए आप क्या संदेश देना चाहते हैं ।

उत्तर ....उदीयमान लेखकों के लिए मेरा बस यही संदेश है कि लिखना सरल नहीं है लिखना एक तपस्या है, एक लगन है, साहित्य में डूबना पड़ता है और तब आप एक श्रेष्ठ रचना लिख सकते हो ।  

16 सीमा असीम जी अंत में

हिन्दी साहित्य के पाठकों की संख्या के विकास के लिए आप क्या

सुझाव देना चाहते हैं ?

उत्तर …. हिंदी साहित्य के पाठकों की संख्या का विकास करने के लिए मेरा सुझाव तो यही रहेगा कि जन जन तक पहुंचे । उस हर जगह तक हमारी किताबें पहुंचे जहां जहां हिन्दी भाषी लोग हैं । उनका मूल्य काफी कम रखा जाए जिससे हर इंसान खरीद सके ।  हर कॉलेज के हिन्दी विभाग में, रोडवेज, स्टेशन  तथा हर बुक स्टोर पर उपलब्ध होनी चाहिए।

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