तुम

 तुम भी मुझे यूँ ही सोचते होंगे 

ढलती शाम को मचलते होंगे 

नहीं पाते होंगे चैन भीड़ में भी 

एक झलक पाने को तरसते होंगे 

सीमा असीम 

27,4,24

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