माई री
माई री किससे कहूँ अपने हिया की पीर
सच मे माँ कभी कभी मन इतना ही दुखी होता है कि कुछ समझ नहीं आता है, कहाँ चली जाऊं ? कैसे मन को समझाऊं ?पता है अपनों की कही हुई बात सबसे ज्यादा दुःख देती है , जब हमने सुनी तब मुझे समझ आया कि कैसे कैसे दुःख बर्दास्त करने पड़ते हैं, जब हम अपने माँ बाप से दूर चले जाते हैं लेकिन फिर भी एक आस रहती कि जब जायेंगे और माँ से मिलेंगे तो कुछ बातें कह सुन कर मन को हल्का कर लेंगे लेकिन जब माँ ही हमें छोड़कर कहीं दूर ईश्वर के पास चली जाएँ तब हम अपने मन को कैसे ढाढस बधाएं? कैसे इस दुःख से पार पायें, फिर उसके बाद और सब लोगों की बातें, गुस्सा, नफरत जब अकेले ही सहने पड जाएँ तब तो बड़ी मुश्किल होती है !
माँ तुम खुश रहना खूब खुश, सारे स्वर्ग तुम्हारे चरणों में पड़े रहें और तुम किसी महारानी की तरह रहना, हमारा तो मन यूँ ही पागल है जरा सी बात पर दुखी हो जाता है फिर कोई जरा प्रेम से बोलेगा, सब सही हो जाएगा , माँ खूब सुख से रहना ...... प्यारी माँ
4,4,24
Comments
Post a Comment