प्रेम कहानी
गतांक से आगे 
चलो प्रिय आज एक काम करते हैं ? 
?
ये दुनियाँ हम दोनों आपस में बाँट लेते हैं ...चाँद सूरज तारे धरती आकाश ये नदिया सबकुछ  तुझे दे देती हूँ ॥
फिर तेरे लिए क्या बचा ?
मेरे लिए तुम ॥सुनो मेरे प्रिय तुम तो मेरे हो न ?
पागल ...मैं तो वैसे भी तेरा ही हूँ ॥ये सबकुछ मुझे देने की क्या जरूरत ?
जरूरत है न ॥इतना सारा बोझ संभालते संभालते मैं थक जो गयी थी !
हाहाहा ! वो ज़ोर से हँसता है !
वो उसका मुंह देखकर कहती है ॥अरे पागल इसमे इतना हंसने की क्या बात है जो इतनी ज़ोर से हंस रहा है?
अरे मेरी पगली फिर तू दो दिनों बाद कहेगी कि ये सारा बोझ तू अकेले उठाए थक गया होगा, लाओ अब मुझे दे दो और तुम स्वछंद होकर, स्वतंत्र होकर दुनियाँ में घूम आओ !
न न अब नहीं कहूँगी !
क्यों ,, अब क्या हुआ ?
क्योंकि अब दुनियाँ में पाप बहुत हैं तो इसका बजन बहुत बढ़ गया है ,,,और यह बोझ मैं भला कैसे उठा पाऊँगी ...?
तो मैं इतने सारे पापों का बोझ उठाए फिरूँ ?
नहीं प्रिय तुम तो बस पुण्य करो और इन पापों की परवाह करना छोड़ दो ....
पुण्य ??? आज के दौर में पुण्य कैसे किया जाता है ?
सुनो न प्रिय पहले पूरी बात ....तुम बस प्यार करो ...क्योंकि प्रेम में ही वो शक्ति है जो सारे पापों का नाश कर देती है ,,,
प्रेम ही रब है प्रेम ही पूजा है 
अरे तू फिर मुस्कराया ?
यह मुस्कान ही तो प्रेम है न, जो तू मेरे चेहरे पर खिला देती है ...
अच्छा जी ॥
हाँ जब किसी के चेहरे पर मुस्कान आती है तो मन में खुशी छा जाती है और दिल में प्रेम उतर आता है ... तू मेरे चेहरे पर छोटी से मुस्कान लाकर मेरा दिल जीत लेती है और फिर मैं तेरा हो जाता हूँ बार बार हो जाता हूँ सदा सदा के लिए ........
फिर बहुत देर तक मुस्कान खिलती रही और लब महकते रहे ......
क्रमशः 
सीमा असीम

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