दिल आज खुशी से पागल है 

कि आज मुझे खुद पर ही प्यार आया है 
झरना सा फूट पड़ा मन में 
तुम बहार का संदेश जो ले आए 
छुआ था तुमने जिन उँगलियों को 
वे लिखने लगी प्रिय ओ मेरे प्रिय ओ मेरे प्रियतम 
दीवानी सी होकर 

महक उठी मेरी देह 
अंग अंग से आने लगी खुशबू 
झरने लगा आँखों से ये कैसा खुशी का प्रेम सरोवर 
मन की क्यारियाँ हरिया आयी
प्रिय ओ सनम यूं ही पुकार लो मेरे नाम को अपने लबों से 
कि आज मुझे खुद पर ही प्यार आया है 

चाहती हूँ खुद को ही सवारना निखारना
नख से लेकर शिख तक 
वो देखो चाँद खिड़की से झाँकने लगा 
शरमा आयी मैं खुद से ही 
मुस्करा पड़े लब 
याद जो आ गया प्रिय 
तुम्हारी आँखों से झरता प्रेम 
चन्दन सा महकता प्रेम 
उतर आया है मेरे रोम रोम मे 
कि आज मुझे खुद पर ही प्यार आया है !!
सीमा असीम

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