गतांक से आगे
मेरे प्रिय जब मैं लिखती हूँ प्रेम, तब पवित्र हो जाता है वो समय, वो कलम, वो कागज और उस वक्त
मेरे प्रिय जब मैं लिखती हूँ प्रेम, तब पवित्र हो जाता है वो समय, वो कलम, वो कागज और उस वक्त
ईश्वर का असीम प्रकाश उतर आता है मेरे आसपास ... मेरी आँखों को चौंधियाता हुआ ! यह प्रेम रूपी पूंजी इंसान को बहुत अमीर बना देती है गर पात्र वह व्यक्ति हो जो प्रेम से परिपूर्ण हो किसी दुराग्रह का शिकार न हो ! प्रेम बहुत ही पवित्र और प्यारे मन की सच्ची भावना है, अहसास है जिसमें सिर्फ दिल काम करता है उसमें दिमाग लगाने वाले कैसे भला समझेंगे ! प्रेम करना मानों अपने पूरे अस्तित्व के
साथ ईश्वर की उपासना करना, पूर्ण समर्पण के साथ, बिना किसी स्वार्थ के साथ या बिना किसी चाह के साथ ! कभी कभी आज के प्रेम को देख कर दिल घबरा जाता है घुटन सी होती है कि कैसे लोग उन अहसासों को सरेआम कर देते हैं जो आपस में सहमति से जिये होते हैं .....मन ही मन शर्म का अनुभव होता है ...क्या यह प्यार है या ये कैसी अनुभूति है जो उसे दुख दे, तकलीफ दे, नीचा दिखाये जिसने आपको प्रेम का उपहार दिया, जिंदगी के खूबसूरत पल दिये ... सच तो यह है कि हमारे भोजन से शरीर और हमारे प्रेम से हमारी
आत्मा का विकास होता है !
प्रेम सुन्दर शब्द है एक प्यारा सा अहसास है जो हमें झुकना सिखाता है हार जाना सिखाता है सब कुछ छोड़ देना सिखाता है पाना नहीं ! सच्चा प्रेम तो प्रेम की छाया में निहित होता है ....प्रेम स्वयम से नहीं बल्कि अपने प्रिय से अपने प्यारे प्रियतम से करना सिखाता है प्रेम तो हमें अपने प्रिय का दास बना देता है !
मेरा मुझ में कुछ नहीं जो कुछ है सो तोर ...
सच्चा प्रेम हमें बुलंदी पर ले जाता है और झूठा प्रेम गिरा देता है हमारा विनाश कर देता है ! ......प्रेम को निभाने के लिए दो लोगों की कभी जरूरत ही नहीं होती ......बस जरूरत होती है सही पात्र की .....जिसमें हम उस ईश्वर की छवि को देख सकें ... क्रमशः
सीमा असीम
प्रेम सुन्दर शब्द है एक प्यारा सा अहसास है जो हमें झुकना सिखाता है हार जाना सिखाता है सब कुछ छोड़ देना सिखाता है पाना नहीं ! सच्चा प्रेम तो प्रेम की छाया में निहित होता है ....प्रेम स्वयम से नहीं बल्कि अपने प्रिय से अपने प्यारे प्रियतम से करना सिखाता है प्रेम तो हमें अपने प्रिय का दास बना देता है !
मेरा मुझ में कुछ नहीं जो कुछ है सो तोर ...
सच्चा प्रेम हमें बुलंदी पर ले जाता है और झूठा प्रेम गिरा देता है हमारा विनाश कर देता है ! ......प्रेम को निभाने के लिए दो लोगों की कभी जरूरत ही नहीं होती ......बस जरूरत होती है सही पात्र की .....जिसमें हम उस ईश्वर की छवि को देख सकें ... क्रमशः
सीमा असीम

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